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राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में मैटरनल डेथ से हड़कंप, 6 दिन में 9 महिलाओं की मौत - rajasthan faces maternal mortality crisis 9 deaths in six days

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में मैटरनल डेथ से हड़कंप, 6 दिन में 9 महिलाओं की मौत राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में 6 दिनों में 9 महिलाओं की मैटरनल डेथ हुई, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। ...और पढ़ें समय कम है?…

Jagran के अनुसार12 जुलाई 2026 को 08:01 am बजे
राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में मैटरनल डेथ से हड़कंप, 6 दिन में 9 महिलाओं की मौत - rajasthan faces maternal mortality crisis 9 deaths in six days

सौजन्य से:- Jagran

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में मैटरनल डेथ से हड़कंप, 6 दिन में 9 महिलाओं की मौत

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में 6 दिनों में 9 महिलाओं की मैटरनल डेथ हुई, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। ...और पढ़ें

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

डिजिटल डेस्क, जयपुर। राजस्थान में सरकारी अस्पतालों में मैटरनल डेथ की सीरीज ने खतरे की घंटी बजा दी है। भीलवाड़ा और बांसवाड़ा जिलों में महज छह दिनों में 9 महिलाओं की जान चली गई। 5 जुलाई से 10 जुलाई के बीच दोनों जिलों में हुई मौतों के बाद जयपुर से मेडिकल टीमें भेजी गईं। सरकार ने कहा कि यह कोई कॉमन फैक्टर नहीं है.

भीलवाड़ा और बांसवाड़ा से पहले कोटा, बीकानेर और जोधपुर जिले में भी ऐसी ही मौतें हुई थीं। मई से अब तक पांच जिलों में मैटरनल डेथ हो चुकी है। मौत का संख्या 18 हो गई है।

इन मौतों और सिस्टम की खामियों के बीच सरकार ने मौतों के लिए कोमोरबिडिटी को जिम्मेदार ठहराया है। सरकार ने मेडिकल स्टाफ की लापरवाही और अस्पताल के इन्फेक्शन और घटिया या नकली दवाओं सहित अन्य सभी फैक्टर्स को खारिज कर दिया है।

हेल्थ मिनिस्टर गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि सरकार इन मामलों को बहुत सीरियसली ले रही है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई कॉमन वजह नहीं मिली और अस्पतालों की तरफ से किसी भी तरह की ढिलाई या कमी से इनकार किया।

भीलवाड़ा जिले के महात्मा गांधी अस्पताल में पांच औरतों की मौत हो गई, जिनमें तीन की सिजिरेयन डिलीवरी हुई, एक प्रेग्नेंट महिला और पांचवीं को गायनेकोलॉजिकल कंडीशन थी। राजमाता विजयाराजे सिंधिया मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. पूजा गंगराड़े, जो हॉस्पिटल की देखरेख करती हैं, ने कहा: “पहली नज़र में, दो मौतें कार्डियक अरेस्ट की वजह से हुईं, और तीसरी फेफड़ों की प्रॉब्लम की वजह से हुई। चौथी प्रेग्नेंट महिला का तो ऑपरेशन भी नहीं हुआ था।”

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भीलवाड़ा के CMHO डॉ. अरुण गौड़ ने इन मौतों की कई वजहें बताईं, जिनमें हीमोग्लोबिन का लेवल कम होना और पहले से मौजूद दूसरी मेडिकल कंडीशन शामिल हैं। मौतों की जांच के लिए शनिवार को सीनियर डॉक्टरों की छह मेंबर की कमेटी बनाई गई है।

वहीं बांसवाड़ा में एक नाबालिग समेत चार महिलाओं की मौत हुई, जिनमें से तीन की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। डिलीवरी के तुरंत बाद गंभीर एनीमिया और हाई बीपी के कारण मौत हुई। इन मौतों की जांच के लिए कलेक्टर इंद्रजीत यादव की लीडरशिप में पांच मेंबर की जांच कमेटी बनाई गई है।

बांसवाड़ा के CMHO डॉ. खुशपाल सिंह राठौर ने कहा, "शुरुआती जांच से पता चला है कि मौतें पिछली मेडिकल दिक्कतों से जुड़ी थीं, पहली नजर में, मौत का कारण वाइटल्स में अचानक गिरावट लग रहा है।"

बार-बार हो रही मौतों ने राज्य के हेल्थकेयर सिस्टम में गंभीर कमियों को उजागर किया है और पारदर्शिता और कार्रवाई न करने के आरोप लगाए हैं। कोटा, बीकानेर और जोधपुर में पहले की जांच की रिपोर्ट पब्लिक नहीं की गई है, और अब तक कोई जवाबदेही तय नहीं की गई है।

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