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असम में बाढ़ पीड़ितों के लिए जयपुर से पहुंची मदद: आटे से लेकर स्कूल बैग तक भेजी गई, 60 हजार लोगों तक राहत सामग्री पहुंची - Jaipur News

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Dainik Bhaskar के अनुसार11 अगस्त 2026 को 01:15 pm बजे
असम में बाढ़ पीड़ितों के लिए जयपुर से पहुंची मदद:  आटे से लेकर स्कूल बैग तक भेजी गई, 60 हजार लोगों तक राहत सामग्री पहुंची - Jaipur News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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असम में बाढ़ पीड़ितों के लिए जयपुर से पहुंची मदद:आटे से लेकर स्कूल बैग तक भेजी गई, 60 हजार लोगों तक राहत सामग्री पहुंची

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राजस्थान के युवा नेता निर्मल चौधरी इन दिनों असम में बाढ़ पीड़ियों की मदद में जुटे हैं। पिछले 6 दिनों से लगातार वे बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहकर जरूरतमंद परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने के अभियान में जुटे हुए हैं।

असम के नाजिरा, पानबेसा, भादोरा, निमाइजान, बेतबाड़ी, गायन, कमलछोपरी, नेपाली खुटी, सिमलगुड़ी, बनमुख, बिहूबार, लाकुवा, राजापुल, गेलेकी, खेलुआ, बालीघाट, नौजान, होलांग कटनी, अथखेड़ और हुतिआमुख सहित कई बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंचकर 50 से 60 हजार लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा चुकी है।

बाढ़ ने जहां हजारों परिवारों से उनका सामान्य जीवन छीन लिया है। वहीं, इस कठिन समय में राहत दल प्रभावित लोगों के बीच केवल सामान नहीं, बल्कि सहयोग, भरोसे और इंसानियत का संदेश लेकर पहुंच रहा है। दुर्गम रास्तों, जलभराव और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद राहत कार्य लगातार जारी है।

जरूरत का हर सामान, अपनों की तरह पहुंचाने की कोशिश

प्रभावित परिवारों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए राहत सामग्री में आटा, चावल, दाल, तेल, सब्जियां, बर्तन, पानी की बोतलें, बाल्टियां, मग, सैनिटरी पैड, फिनाइल, कपड़े, चप्पलें, कॉपियां, किताबें, स्कूल बैग और पशु आहार सहित रोजमर्रा की जरूरत का जरूरी सामान वितरित किया जा रहा है।

विशेष रूप से बच्चों की जरूरतों का भी ध्यान रखा जा रहा है, ताकि बाढ़ की इस आपदा के बीच उनकी पढ़ाई और भविष्य की उम्मीद पूरी तरह प्रभावित न हो।

मुश्किल वक्त में साथ खड़ा होना ही सबसे बड़ी सेवा

निर्मल चौधरी का कहना है कि आपदा के समय किसी जरूरतमंद के साथ खड़ा होना ही सच्ची मानव सेवा है। बाढ़ से प्रभावित परिवारों की पीड़ा को केवल दूर से देखना नहीं, बल्कि उनके बीच पहुंचकर उनकी जरूरतों को समझना और यथासंभव मदद करना इस अभियान का उद्देश्य है।

राहत अभियान का मकसद केवल आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन परिवारों को यह एहसास दिलाना भी है कि मुश्किल की इस घड़ी में वे अकेले नहीं हैं।

असम की बाढ़ ने भले ही हजारों परिवारों के सामने मुश्किलें खड़ी की हों, लेकिन इन कठिन परिस्थितियों के बीच जारी यह राहत अभियान इंसानियत, संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी की एक सकारात्मक तस्वीर पेश कर रहा है।

राहत कार्य आगे भी लगातार जारी रहेगा और अधिक से अधिक प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

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