राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए आवेदनों में कमी: राजस्थान के 5 लाख शिक्षकों में से महज 73 ने किया आवेदन।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए आवेदन आ रहे हैं, लेकिन राजस्थान के शिक्षकों में कोई खास रुचि नहीं है। 5 लाख शिक्षकों में से केवल 73 ने आवेदन किया है। इसमें से केवल 12 ने ही आवेदन की प्रक्रिया पूरी कराई है।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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- So Far, 73 Applications Have Been Received, Of Which Only 5 Are Teachers From Jaipur District.
अब तक 73 आवेदन आए, इनमें जयपुर जिले के महज 5 शिक्षक
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राजस्थान के शिक्षकों में राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षक सम्मान पाने के लिए कोई रूचि नहीं है। अब तक के आवेदनों की संख्या को देखे तो यही लग रहा है। शिक्षा मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 के लिए देशभर के शिक्षकों से आवेदन मांगे जा रहे हैं, लेकिन राजस्थान के 5 लाख शिक्षकों में से महज 73 शिक्षकों ने आवेदन किया है। इसमें भी केवल 12 ने ही आवेदन की प्रक्रिया पूरी करके उसे सबमिट किया है। अन्य आवेदन तो पेंडिंग पड़े हैं। जयपुर जिले से महज 5 शिक्षकों ने ही आवेदन किया है, जबकि जयपुर जिले में सर्वाधिक शिक्षक कार्यरत है। इसके बावजूद संख्या बेहद कम रही है।
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी एक पत्र में सामने आई आवेदनों की यह स्थिति चिंताजनक है। आठ जिले ऐसे हैं, जहां से एक भी शिक्षक ने इस पुरस्कार के लिए आवेदन नहीं किया। यह स्थिति तो तब है जब विभाग ने बार-बार शिक्षकों को आवेदन के लिए प्रेरित किया था। शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों को आवेदन बढ़ाने के लिए कहा था, इसके बावजूद संख्या नहीं बढ़ पाई है। इतनी कम संख्या को देखकर शिक्षा विभाग भी हैरान है। निदेशालय के पत्र के अनुसार उदयपुर, सिरोही, सलूंबर, फलौदी, डीडवाना, बूंदी, चित्तौडगढ़ और भरतपुर ऐसे जिले हैं, जहां से एक भी शिक्षक ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए आवेदन नहीं किया है।
कम आवेदन के संभावित कारण
शिक्षा विभाग और शिक्षकों से जुड़े जानकारों के अनुसार कम आवेदन के पीछे कई कारण है। पिछले सालों में राज्य से हर साल 2-2 शिक्षकों का चयन ही होता आया है। इसको देखते हुए शिक्षकों को लगता है कि अंतिम स्तर पर 2 शिक्षकों में स्थान बनाना मुश्किल है। ऐसे में शिक्षक आवेदन ही नहीं करते हैं। साथ ही ऑनलाइन पोर्टफोलियो और दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया जटिल है। शिक्षकों को दस्तावेज तैयार करने में काफी समय चाहिए। इससे वे आवेदन नहीं कर पाते हैं। आवेदन की जानकारी और प्रचार-प्रसार का दायरा भी सीमित है। स्कूलों में शैक्षणिक व प्रशासनिक कार्यों का अधिक दबाव रहता है। इसलिए वे आवेदन के लिए समय नहीं निकाल पाते हैं।
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