जयपुर: क्या नोटिस दिए बिना तोड़ी नूरानी मस्जिद? हाईकोर्ट ने जेडीए से 8 हफ्ते में मांगा जवाब
जयपुर: क्या नोटिस दिए बिना तोड़ी नूरानी मस्जिद? हाईकोर्ट ने जेडीए से 8 हफ्ते में मांगा जवाब जयपुर की नूरानी मस्जिद-मदरसा विध्वंस मामले में हाईकोर्ट ने जेडीए समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। वक्फ बोर्ड ने कार्रवाई…

सौजन्य से:- Amar Ujala
जयपुर: क्या नोटिस दिए बिना तोड़ी नूरानी मस्जिद? हाईकोर्ट ने जेडीए से 8 हफ्ते में मांगा जवाब
जयपुर की नूरानी मस्जिद-मदरसा विध्वंस मामले में हाईकोर्ट ने जेडीए समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। वक्फ बोर्ड ने कार्रवाई से पहले नोटिस और सुनवाई का मौका नहीं देने का आरोप लगाया।
विस्तार
जयपुर की नूरानी मस्जिद और मदरसा से जुड़े कथित विध्वंस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) से जवाब मांगा है। राजस्थान बोर्ड ऑफ मुस्लिम वक्फ की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस मनीष शर्मा की एकलपीठ ने जेडीए समेत अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने जवाब दाखिल करने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया है।
इस मामले में फिलहाल हाईकोर्ट ने जेडीए की कार्रवाई को सही या गलत नहीं ठहराया है। सुनवाई का मुख्य सवाल यह है कि जिस संपत्ति को वक्फ बोर्ड अपनी संपत्ति बता रहा है, वहां कार्रवाई से पहले उसे नोटिस और अपना पक्ष रखने का पर्याप्त मौका दिया गया था या नहीं।
वक्फ बोर्ड का दावा- कार्रवाई से पहले नहीं मिला मौका
वक्फ बोर्ड ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि 8 जून 2026 को जेडीए की कार्रवाई में अशोक विहार, नंदपुरी, मालवीय नगर स्थित प्लॉट नंबर 63 पर बनी नूरानी मस्जिद और मदरसा को ध्वस्त किया गया। बोर्ड का कहना है कि कार्रवाई से पहले उसे न तो विधिवत नोटिस दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर मिला।
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि जेडीए की ओर से 5 जून की तारीख वाला एक नोटिस सामने आया था, जिसमें 7 जून को उपस्थित होने के लिए कहा गया था। वक्फ बोर्ड का कहना है कि यह नोटिस उसे विधिवत प्राप्त नहीं हुआ। साथ ही नोटिस में संपत्ति का प्लॉट या संपत्ति नंबर भी स्पष्ट नहीं था।
वक्फ रजिस्टर में दर्ज होने का दावा
वक्फ बोर्ड के अनुसार विवादित संपत्ति वर्ष 1988 में पंजीकृत वक्फ विलेख के जरिए वक्फ संपत्ति बनी थी। बाद में इसे राजस्थान बोर्ड ऑफ मुस्लिम वक्फ के रजिस्टर में क्रम संख्या 625 पर दर्ज किया गया। याचिका में दावा किया गया है कि यहां वर्ष 1981 से धार्मिक गतिविधियां संचालित होती रही हैं।
बोर्ड ने जेडीए की कार्रवाई को मनमाना और अवैध बताते हुए उसे रद्द करने की मांग की है। साथ ही याचिका में कहा गया है कि कार्रवाई के दौरान प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और वक्फ अधिनियम के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया।
यह भी पढें- राजस्थान: 14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया पूरी, सबसे ज्यादा पद महिलाओं के लिए
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
वक्फ बोर्ड ने अपनी दलीलों के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के 2024 के उस फैसले का भी हवाला दिया है, जिसमें निर्माण गिराने से पहले नोटिस, जवाब देने का अवसर, सुनवाई और अंतिम आदेश जैसी प्रक्रिया का पालन करने की बात कही गई थी।
याचिका में इसी आधार पर दावा किया गया है कि नूरानी मस्जिद और मदरसे के खिलाफ कार्रवाई से पहले निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए था।
अब जेडीए के जवाब पर टिकी नजर
हाईकोर्ट ने फिलहाल मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है। अदालत ने जेडीए और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर आठ सप्ताह में जवाब मांगा है।
अब अगली सुनवाई में जेडीए की ओर से यह बताया जाएगा कि 8 जून की कार्रवाई किस आधार पर की गई, संबंधित संपत्ति को लेकर प्राधिकरण का क्या रिकॉर्ड है और कार्रवाई से पहले नोटिस व सुनवाई की प्रक्रिया किस तरह पूरी की गई।
मामले की अगली सुनवाई आठ सप्ताह बाद होगी। तब तक हाईकोर्ट के मौजूदा आदेश को केवल नोटिस जारी करने की कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है, इसे विध्वंस कार्रवाई पर अदालत की अंतिम राय नहीं माना जा सकता।
Powered by Reporting Rajasthan Files
संबंधित ख़बरें

राजस्थान युवा कांग्रेस अध्यक्ष पद का परिणाम जारी: 6 लाख से ज्यादा वोट लेकर अभिषेक चौधरी सबसे आगे

ACTION PLAN : सीएम भजनलाल शर्मा आज करेंगे नवनिर्वाचित निकाय प्रमुखों से संवाद, तय होगा 100 दिन का रोडमैप

From the edge of extinction, two captive-bred Great Indian Bustards released into wild in Rajasthan


