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निकाय चुनाव की घोषणा के साथ राजस्थान में आचार संहिता लागू; 9-11 सितंबर को दो चरणों में वोटिंग

निकाय चुनाव की घोषणा के साथ राजस्थान में आचार संहिता लागू; 9-11 सितंबर को दो चरणों में वोटिंग प्रदेश के 309 शहरी निकायों में कुल 10,245 पार्षद पदों के लिए चुनाव होंगे। इनमें 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगरपालिकाएं श…

Hindustan के अनुसार20 अगस्त 2026 को 02:55 am बजे
निकाय चुनाव की घोषणा के साथ राजस्थान में आचार संहिता लागू; 9-11 सितंबर को दो चरणों में वोटिंग

सौजन्य से:- Hindustan

निकाय चुनाव की घोषणा के साथ राजस्थान में आचार संहिता लागू; 9-11 सितंबर को दो चरणों में वोटिंग

प्रदेश के 309 शहरी निकायों में कुल 10,245 पार्षद पदों के लिए चुनाव होंगे। इनमें 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगरपालिकाएं शामिल हैं। पहले चरण में पार्षदों का चुनाव कराया जाएगा। पार्षदों के चुनाव के बाद संबंधित निकायों में मेयर, सभापति और नगरपालिका अध्यक्ष के चुनाव होंगे।

राजस्थान में लंबे समय से टल रहे शहरी निकाय चुनावों का आखिरकार ऐलान हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश के सभी 309 शहरी निकायों के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। चुनाव दो चरणों में होंगे। पहले चरण में 9 सितंबर और दूसरे चरण में 11 सितंबर को मतदान कराया जाएगा। चुनाव कार्यक्रम जारी होते ही प्रदेश के सभी 309 शहरी निकायों में तत्काल प्रभाव से आचार संहिता लागू हो गई है। यह आचार संहिता चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक प्रभावी रहेगी।

राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की। चुनाव की घोषणा के साथ ही शहरी क्षेत्रों में सरकार और स्थानीय निकायों की ओर से नए विकास कार्यों की शुरुआत पर रोक लग गई है। आचार संहिता के दौरान किसी नए काम की घोषणा नहीं की जा सकेगी और न ही नए वर्क ऑर्डर जारी किए जा सकेंगे। हालांकि, पहले से स्वीकृत और चल रहे विकास कार्य जारी रहेंगे। ऐसे कामों को बीच में रोकने की जरूरत नहीं होगी, लेकिन नए काम शुरू नहीं किए जा सकेंगे।

309 निकायों में 10,245 पार्षद चुनेंगे जनता

प्रदेश के 309 शहरी निकायों में कुल 10,245 पार्षद पदों के लिए चुनाव होंगे। इनमें 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगरपालिकाएं शामिल हैं। पहले चरण में पार्षदों का चुनाव कराया जाएगा। पार्षदों के चुनाव के बाद संबंधित निकायों में मेयर, सभापति और नगरपालिका अध्यक्ष के चुनाव होंगे।

निकाय प्रमुखों के पदों के आरक्षण की स्थिति भी पहले ही तय की जा चुकी है। 309 निकायों में से 60 निकाय प्रमुख पद अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षित किए गए हैं। वहीं 50 निकायों में अनुसूचित जाति (एससी) और 11 निकायों में अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए निकाय प्रमुख का पद आरक्षित है।

3,356 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित

कुल 10,245 पार्षद पदों में से 3,356 पद महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे। हर श्रेणी में 33 फीसदी वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। आरक्षण व्यवस्था के तहत 1,933 वार्ड ओबीसी, 1,794 वार्ड एससी और 395 वार्ड एसटी के लिए आरक्षित हैं।

कुल 6,123 वार्ड अनारक्षित रखे गए हैं। इनमें 4,120 वार्ड सामान्य यानी ओपन श्रेणी में हैं, जबकि 2,003 वार्ड अनारक्षित महिला श्रेणी के हैं। इस तरह आरक्षण व्यवस्था के बाद सभी वर्गों के लिए वार्डों का बंटवारा तय कर दिया गया है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद चुनाव

राजस्थान में निकाय चुनावों में देरी को लेकर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने निकाय और पंचायत चुनावों की प्रक्रिया तय समय में पूरी कराने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट ने 15 नवंबर तक दोनों चुनाव कराने और 15 अगस्त तक आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया पूरी करने के आदेश दिए थे।

इसके बाद स्वायत्त शासन विभाग ने निकाय प्रमुखों और वार्डों के आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया पूरी की। आरक्षण से संबंधित पूरा डेटा राज्य निर्वाचन आयोग को सौंपे जाने के बाद आयोग ने चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया है।

आचार संहिता से विधानसभा में अटकेंगे अहम बिल

निकाय चुनाव की आचार संहिता लागू होने का असर विधानसभा के मानसून सत्र पर भी पड़ सकता है। गुरुवार से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में सरकार कुछ अहम विधेयकों को पारित नहीं करा सकेगी। इनमें समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी बिल और खेजड़ी संरक्षण से संबंधित ट्री बिल भी शामिल हैं।

सरकार की रणनीति के तहत इन विधेयकों को मानसून सत्र में सदन में रखा जा सकता है, लेकिन आचार संहिता के कारण इन्हें पारित कराने में मुश्किल होगी। इसके बाद नवंबर के आखिर में विधानसभा का दोबारा सत्र बुलाकर इन विधेयकों को पारित कराने की तैयारी की जा सकती है। मानसून सत्र के दो दिन चलने की संभावना है।

निकाय चुनाव की घोषणा के साथ ही अब प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में राजनीतिक गतिविधियां तेज होंगी। पार्षद पदों के लिए उम्मीदवारों के चयन और टिकट वितरण की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही प्रमुख राजनीतिक दलों में चुनावी तैयारियां भी जोर पकड़ेंगी।

लेखक के बारे में

Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)

सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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