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दिव्यांग बच्चों का प्रदर्शन, बोले- स्कूल में पानी तक नहीं: गहलोत बोले- ऐसे टीचर्स की नियुक्ति, जिन्हें खुद साइन लैंग्वेज नहीं आती; प्रिंसिपल को हटाया, टीचर APO - Jaipur News

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Dainik Bhaskar के अनुसार5 अगस्त 2026 को 01:15 pm बजे
दिव्यांग बच्चों का प्रदर्शन, बोले- स्कूल में पानी तक नहीं:  गहलोत बोले- ऐसे टीचर्स की नियुक्ति, जिन्हें खुद साइन लैंग्वेज नहीं आती; प्रिंसिपल को हटाया, टीचर APO - Jaipur News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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दिव्यांग बच्चों का प्रदर्शन, बोले- स्कूल में पानी तक नहीं:गहलोत बोले- ऐसे टीचर्स की नियुक्ति, जिन्हें खुद साइन लैंग्वेज नहीं आती; प्रिंसिपल को हटाया, टीचर APO

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जयपुर के राजकीय सेठ आनंदीलाल पोद्दार मूक-बधिर उच्च माध्यमिक स्कूल में आज हंगामा हो गया। दिव्यांग छात्र-छात्राओं ने स्कूल में शौचालयों की बदहाल स्थिति, पानी का संकट और जर्जर भवन की समस्या से परेशान होकर प्रदर्शन किया।

मामले की सूचना पर शिक्षा विभाग की टीम, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी स्कूल पहुंचे। गहलोत ने कहा कि बच्चों की समस्या को लेकर मैं खुद सीएम भजनलाल शर्मा को पत्र लिखूंगा। उन्हें बताऊंगा कि स्कूल में ऐसे टीचर्स की नियुक्ति की गई है, जिन्हें खुद साइन लैंग्वेज नहीं आती है। वहीं हालात भी बद से बदतर है।

निरीक्षण में कई खामियां सामने आने के बाद विभाग ने तत्काल प्रिंसिपल को हटा दिया गया। वहीं एक टीचर और एक फोर्थ ग्रेड कर्मचारी को भी APO कर दिया गया।

स्कूल में प्रदर्शन की PHOTOS

क्लासरूम की दीवारों पर दरार

जवाहरलाल नेहरू मार्ग में स्थित राजकीय सेठ आनंदीलाल पोद्दार स्कूल के छात्र प्रदर्शन करते गेट पर बैठ गए। छात्रों का कहना है कि स्कूल में लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। शौचालय इस्तेमाल करने लायक नहीं हैं, जिससे हर दिन परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई क्लासरूम की दीवारों और कमरों में दरारें पड़ चुकी हैं।

इसके साथ ही पीने के पानी की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। स्टूडेंट्स का आरोप है कि इन समस्याओं को लेकर कई बार स्कूल प्रशासन और प्रिंसिपल को अवगत कराया गया, लेकिन शिकायतों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। समस्याओं का समाधान नहीं होने पर मजबूरन प्रदर्शन करना पड़ा।

प्रिंसिपल को पद से हटाया

प्रदर्शन की सूचना मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी आशा गुप्ता ने स्कूल का निरीक्षण किया। जांच के दौरान सफाई व्यवस्था, भवन की स्थिति और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं में कई गंभीर कमियां सामने आई।

इसके बाद विभाग ने तत्काल प्रभाव से प्रिंसिपल भारत जोशी को पद से रिलीव कर दिया है। इसके साथ ही एक टीचर और एक फोर्थ ग्रेड कर्मचारी को भी एपीओ कर दिया गया।

वाइस प्रिंसिपल को कार्यवाहक प्रिंसिपल की जिम्मेदारी सौंप दी है, ताकि स्कूल का संचालन प्रभावित न हो और व्यवस्थाओं में जल्द सुधार किया जा सके।

विशेष कमेटी का भी गठन, स्कूल में होगा काम

शिक्षा विभाग ने स्कूल में व्याप्त समस्याओं के समाधान के लिए एक विशेष कमेटी का भी गठन किया है। यह कमेटी विद्यालय की सफाई व्यवस्था, पेयजल, भवन की स्थिति और अन्य मूलभूत सुविधाओं का आकलन कर जल्द रिपोर्ट देगी। रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक मरम्मत और सुधार कार्य कराए जाएंगे, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

शिक्षा विभाग का कहना है कि विद्यार्थियों की सुविधाओं से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। स्कूल में सामने आई कमियों को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाएगा और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

राजनीति से ऊपर उठकर बच्चों के बारे में सोचे सरकार

स्कूल में प्रदर्शन की सूचना पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी पहुंचे। उन्होंने बच्चों और स्टाफ से बात की। इसके बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि जिन लोगों को खुद को साइन लैंग्वेज नहीं आती है, उन टीचर्स की स्कूल में नियुक्ति कर रखी थी। इसके साथ ही स्कूल के हालात भी काफी खराब थे। शौचालय की सफाई नहीं हो रही, कमरों में गंदगी फैली हुई थी। दीवारें जर्जर हो चुकी है लेकिन सरकार इस और ध्यान नहीं दे रही है।

बच्चों की समस्या को लेकर अब मैं मुख्यमंत्री को पत्र लिखूंगा। मैं उन्हें बताऊंगा कि मैं खुद छात्रों के बीच जाकर उनकी समस्या सुनकर आया हूं। मैं चाहूंगा कि जल्द इन छात्रों की समस्या का समाधान हूं क्योंकि सिर्फ साइन लैंग्वेज ही बच्चों के लिए एकमात्र संवाद का जरिया है।

इसके साथ ही हमने जो निशक्तजनों के लिए विश्वविद्यालय खोला था, आज वह विश्वविद्यालय कागजों में चल रहा है। सरकार को राजनीति से ऊपर उठकर इन बच्चों के बारे में सोचना चाहिए। इनकी सेवा से बढ़कर कुछ नहीं है।

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