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हेलो...बैग लेकर पार्टी ऑफिस पहुंचे; राजस्थान में BJP-कांग्रेस ने शुरू की प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी

हेलो...बैग लेकर पार्टी ऑफिस पहुंचे; राजस्थान में BJP-कांग्रेस ने शुरू की प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी पार्टी सूत्रों के मुताबिक, प्रत्याशियों को फोन करके कार्यालय पहुंचने के निर्देश दिए गए। हाईकमान से मिले निर्देशों के बाद…

Hindustan के अनुसार10 सितंबर 2026 को 06:04 pm बजे
हेलो...बैग लेकर पार्टी ऑफिस पहुंचे; राजस्थान में BJP-कांग्रेस ने शुरू की प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी

सौजन्य से:- Hindustan

हेलो...बैग लेकर पार्टी ऑफिस पहुंचे; राजस्थान में BJP-कांग्रेस ने शुरू की प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, प्रत्याशियों को फोन करके कार्यालय पहुंचने के निर्देश दिए गए। हाईकमान से मिले निर्देशों के बाद कई प्रत्याशी बैग में कपड़े और जरूरी सामान लेकर पार्टी ऑफिस पहुंचने लगे।

राजस्थान के 162 नगरीय निकायों में बुधवार को वोटिंग खत्म होते ही चुनावी माहौल अचानक बदल गया। शाम 6 बजे तक प्रत्याशी बूथों पर वोट डलवाने में जुटे थे, लेकिन मतदान खत्म होते ही कई प्रत्याशियों के फोन घनघनाने लगे। दूसरी तरफ से पार्टी ऑफिस पहुंचने का संदेश था। कुछ देर बाद नजारा बदला हुआ था प्रत्याशी हाथ में बैग लिए पार्टी कार्यालय पहुंच रहे थे और फिर गाड़ियों-बसों में बैठकर रवाना होते नजर आए।

यानी EVM में वोट बंद हुए और प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी का खेल शुरू हो गया। भाजपा-कांग्रेस दोनों ही दल अपने-अपने प्रत्याशियों को एकजुट रखने की कवायद में जुट गए हैं। जहां जीत-हार का फैसला मतगणना में होगा, वहीं बोर्ड बनाने की रणनीति का खेल अभी से शुरू हो गया है।

हेलो... पार्टी ऑफिस आ जाइए, बैग भी लेते आइए!

चित्तौड़गढ़ में मतदान खत्म होने के बाद भाजपा प्रत्याशियों के पास पार्टी की ओर से फोन पहुंचने लगे। प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ पार्टी कार्यालय पहुंचे। खास बात यह रही कि कई प्रत्याशी जरूरी सामान और कपड़ों से भरे बैग लेकर पहुंचे।

पार्टी ऑफिस में पदाधिकारियों के साथ चर्चा के बाद प्रत्याशी अलग-अलग गाड़ियों में बैठकर रवाना हो गए। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगा कि आखिर मतदान के कुछ घंटे बाद ही प्रत्याशियों को इस तरह क्यों जुटाया जा रहा है?

इसे पार्टी की ओर से प्रत्याशियों को मतगणना तक एकजुट रखने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

भीलवाड़ा में BJP के सभी 70 प्रत्याशियों को बुलावा

भीलवाड़ा में भी मतदान खत्म होते ही भाजपा ने अपने प्रत्याशियों को संभालने की कवायद शुरू कर दी। नगर निगम के 70 वार्डों में भाजपा के सभी 70 प्रत्याशियों को पार्टी ऑफिस बुलाया गया।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, प्रत्याशियों को फोन करके कार्यालय पहुंचने के निर्देश दिए गए। हाईकमान से मिले निर्देशों के बाद कई प्रत्याशी बैग में कपड़े और जरूरी सामान लेकर पार्टी ऑफिस पहुंचने लगे।

पार्टी की योजना इन प्रत्याशियों को एक साथ किसी दूसरे स्थान पर ले जाने की बताई जा रही है। हालांकि, उन्हें कहां ले जाया जाएगा, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

भीलवाड़ा में कांग्रेस ने 53 वार्डों में अधिकृत प्रत्याशी उतारे हैं। मतदान के बाद कांग्रेस प्रत्याशियों को पार्टी की ओर से बुलाए जाने की फिलहाल जानकारी नहीं है। दूसरी ओर यहां 154 निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में हैं। इनमें कई प्रत्याशी भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों को सीधी चुनौती दे रहे हैं।

महवा में BJP प्रत्याशी बस में बैठे और जयपुर रवाना

दौसा की महवा नगर पालिका में तो बाड़ेबंदी का नजारा और भी दिलचस्प रहा। वोटिंग खत्म होते ही भाजपा के 35 प्रत्याशियों को विधायक राजेंद्र मीणा बस में बैठाकर जयपुर के लिए रवाना हो गए।

एक तरफ भाजपा प्रत्याशी बस में सवार होकर महवा से निकले तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने अपने 34 उम्मीदवारों को हिंडौन रोड स्थित एक निजी होटल में बुलाया।

होटल में प्रत्याशियों को एकजुट रखने के साथ आगे की रणनीति पर चर्चा की जा रही है। खासकर अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर पार्टी अपने संभावित समीकरणों पर नजर रख रही है।

निर्दलीयों ने भी संभाला अपना ‘कैंप’

महवा में मुकाबला सिर्फ भाजपा और कांग्रेस के बीच नहीं है। निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी अपना अलग मोर्चा तैयार कर लिया है।

पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष विजय बोहरा 22 निर्दलीय उम्मीदवारों को लेकर दिल्ली की ओर रवाना हो गए। ऐसे में महवा में बोर्ड गठन से पहले ही राजनीतिक समीकरणों की तस्वीर दिलचस्प हो गई है।

असली खेल अब मतगणना के बाद?

नगर निकाय चुनाव में मतदान खत्म होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि किसे कितने वोट मिले, बल्कि यह भी है कि जीतने वाले पार्षद किसके साथ खड़े होंगे।

खासकर त्रिशंकु बोर्ड बनने की स्थिति में निर्दलीय प्रत्याशी और मामूली अंतर से जीतने वाले पार्षद बेहद अहम हो जाते हैं। ऐसे में राजनीतिक दल अपने प्रत्याशियों को एकजुट रखने और संभावित टूट-फूट से बचाने की कोशिश करते हैं।

यही वजह है कि मतदान खत्म होते ही राजस्थान के कई शहरों में प्रत्याशियों की आवाजाही शुरू हो गई है। कहीं पार्टी ऑफिस में बुलाया जा रहा है, कहीं होटल में ठहराया जा रहा है तो कहीं बस और गाड़ियों में बैठाकर दूसरे शहर ले जाया जा रहा है।

मतदान का शोर थम चुका है, EVM सील हो चुकी हैं, लेकिन निकाय की कुर्सी के लिए सियासी हलचल अभी थमी नहीं है। अब नजर इस पर है कि मतगणना के बाद किसके पास जीत का आंकड़ा होगा और किसे बोर्ड बनाने के लिए किसका हाथ थामना पड़ेगा।

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