राष्ट्रीय हथकरघा दिवस : CM ने की हैंडलूम उत्पादों की खरीदारी, राज्यवर्धन राठौड़ बोले- AI नहीं ले सकती 'ह्यूमन टच' की जगह
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस : CM ने की हैंडलूम उत्पादों की खरीदारी, राज्यवर्धन राठौड़ बोले- AI नहीं ले सकती 'ह्यूमन टच' की जगह राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर सीएम भजनलाल शर्मा ने विभिन्न हथकरघा उत्पादों की खरीदारी की. मंत्री राज्यवर…

सौजन्य से:- ETV Bharat
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस : CM ने की हैंडलूम उत्पादों की खरीदारी, राज्यवर्धन राठौड़ बोले- AI नहीं ले सकती 'ह्यूमन टच' की जगह
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर सीएम भजनलाल शर्मा ने विभिन्न हथकरघा उत्पादों की खरीदारी की. मंत्री राज्यवर्धन सिंह भी हैंडलूम एग्जीबिशन देखने पहुंचे.
Published : August 7, 2026 at 5:38 PM IST
जयपुर : राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा शुक्रवार को राजस्थान हैंडलूम हाउस पहुंचे और विभिन्न हथकरघा उत्पादों की खरीदारी की. इस दौरान उन्होंने प्रदेशवासियों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा देने और अपने जीवन में स्थानीय उत्पादों को अपनाने की अपील की. वहीं, राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर जवाहर कला केंद्र में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने शिरकत की.
स्थानीय उत्पादों को अपनाने के लिए प्रेरित करें : मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान में हथकरघा का गौरवशाली इतिहास रहा है. प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बड़ी संख्या में कारीगर और बुनकर हथकरघा के माध्यम से अपनी कला को जीवंत बनाए हुए हैं. राजस्थान का हैंडलूम न केवल देश में बल्कि पूरी दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है. हथकरघा से तैयार उत्पादों की देश-विदेश में काफी मांग है और यह क्षेत्र प्रदेश की समृद्ध कला एवं संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार वोकल फॉर लोकल के माध्यम से देशवासियों को स्थानीय उत्पादों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. हैंडलूम दिवस के अवसर पर भी प्रधानमंत्री का यह संदेश कारीगरों और बुनकरों को प्रोत्साहन देने वाला है. जब आमजन स्थानीय उत्पादों की खरीदारी करेंगे तो उसका सीधा लाभ उन लोगों तक पहुंचेगा, जो इन उत्पादों के निर्माण से जुड़े हुए हैं.
— Bhajanlal Sharma (@BhajanlalBjp) August 7, 2026
छोटे-छोटे कारीगरों का पसीना : सीएम ने कहा कि राजस्थान के छोटे-छोटे कारीगरों और दुकानदारों की मेहनत में उनका पसीना और परिश्रम जुड़ा हुआ है. स्थानीय उत्पाद केवल वस्तुएं नहीं, बल्कि प्रदेश की कला, संस्कृति और परंपराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं. आमजन को स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देकर इन कारीगरों का मनोबल बढ़ाना चाहिए. मुख्यमंत्री ने राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में होने वाले हथकरघा कार्य का उल्लेख करते हुए कहा कि सांगानेर, बगरू सहित प्रदेश के कई क्षेत्रों में हैंडलूम और हस्तशिल्प का काम बड़े स्तर पर होता है. अनेक जिले ऐसे हैं, जहां बड़ी संख्या में परिवार हथकरघा और इससे जुड़े कार्यों पर निर्भर हैं.
उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों की खरीदारी से इन परिवारों के जीवन में आर्थिक खुशहाली आएगी और उनकी कला को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा. मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि लोकल फॉर लोकल की भावना के साथ राजस्थान की इस समृद्ध धरोहर को आगे बढ़ाने में सहयोग करें. उन्होंने विश्वास जताया कि आमजन के सहयोग से प्रदेश के कारीगरों, बुनकरों और छोटे व्यापारियों को मजबूती मिलेगी. राजस्थान के हथकरघा उत्पादों की पहचान देश-दुनिया में और व्यापक होगी.
हथकरघा केवल एक उद्योग नहीं : राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर जवाहर कला केंद्र में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में शिरकत करते हुए मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि हथकरघा केवल एक उद्योग नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, संस्कृति और लाखों परिवारों की आजीविका का आधार है. दुनिया भारत को मशीनों से बने उत्पादों के लिए नहीं, बल्कि हाथों से तैयार होने वाली विशिष्ट कलाओं और उनकी कहानियों के लिए पहचानती है और यदि युवाओं ने विरासत संभाली तो राजस्थान की पहचान दुनिया तक पहुंचेगी.
AI नहीं ले सकती 'ह्यूमन टच' की जगह : जवाहर कला केंद्र में लगी हैंडलूम एग्जीबिशन को देखने के बाद मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का अपना महत्व है. समय के साथ तकनीक को अपनाना भी जरूरी है, लेकिन एआई कभी भी किसी कारीगर के हाथों की गर्माहट, मेहनत और भावनाओं को नहीं दे सकती. मशीन से बने कपड़े के पीछे कोई कहानी नहीं होती, जबकि हथकरघा से तैयार हर वस्त्र में किसी बुनकर का समय, श्रम, हुनर और एक परिवार की आजीविका जुड़ी होती है. यही मानवीय स्पर्श भारतीय हथकरघा उत्पादों को दुनिया में अलग पहचान दिलाता है.
इस दौरान उन्होंने कानाराम, सोहन राम और धापू बाई को राज्य स्तर पर मिलने वाले बुनकर सम्मान से नवाजा. साथ ही कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं भी हथकरघा से बने वस्त्र पहनकर देशवासियों को स्वदेशी और स्थानीय उत्पादों को अपनाने का संदेश देते हैं. उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे हैंडलूम उत्पादों से जुड़ें और जब भी कोई हथकरघा से बना सिल्क, कॉटन या अन्य वस्त्र खरीदें तो उसकी कहानी भी लोगों तक पहुंचाएं.
Wear Handloom. Share the Story. Celebrate the Artisan. 🇮🇳
— Col Rajyavardhan Rathore (@Ra_THORe) August 7, 2026
अगली बार जब आप Handloom खरीदें, तो सिर्फ उसे पहनें नहीं उसकी तस्वीर और उसके पीछे की कहानी भी share करें। क्योंकि हर post, reel और story किसी बुनकर की कला को नई पहचान दे सकती है।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर राज्य स्तरीय… pic.twitter.com/IE7gLquqbD
उन्होंने कहा कि सालों से काम कर रहे कारीगरों के हाथों में अनुभव और कौशल की जो परिपक्वता आती है, उसी के आधार पर उन्हें राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय सम्मान मिलते हैं, लेकिन इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है कि नई पीढ़ी भी अपने परिवारों के इस व्यवसाय से जुड़ें. मीडिया और समाज हथकरघा की सफलता की कहानियों को लाखों घरों तक पहुंचाएंगे तो युवाओं का रुझान भी इस क्षेत्र की ओर बढ़ेगा. यूरोप और अमेरिका जैसे देशों में हाथ से बने उत्पादों को अत्यधिक महत्व दिया जाता है और ऐसे उत्पादों की कीमत सामान्य उत्पादों की तुलना में कई गुना अधिक होती है. आने वाले समय में हस्तनिर्मित उत्पाद और ज्यादा मूल्यवान और प्रीमियम श्रेणी में शामिल होंगे.
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मंत्री ने कहा कि हथकरघा और हस्तशिल्प परिवारों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं. विशेष रूप से महिलाएं घर बैठे डिजाइन के अनुरूप उत्पाद तैयार कर अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर सकती हैं. राज्य और केंद्र सरकार डिजाइन विकास, प्रशिक्षण, रॉ मैटेरियल, प्रोटोटाइप और विपणन सहायता उपलब्ध कराकर महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही हैं. जवाहर कला केंद्र में आयोजित प्रदर्शनी का उद्देश्य केवल उत्पादों की बिक्री नहीं, बल्कि युवाओं को हथकरघा और हस्तशिल्प की दुनिया से परिचित कराना है.
बिना किसी अतिरिक्त खर्च के वर्चुअल दुकान : यहां विभिन्न बुनकरों, स्वयं सहायता समूहों और कारीगरों की ओर से तैयार उत्पादों के नमूने, डिजाइन और प्रोटोटाइप प्रदर्शित किए गए हैं. सरकार इन समूहों को डिजाइन, तकनीकी सहयोग, रॉ मैटेरियल और प्रोटोटाइप उपलब्ध करा रही है ताकि वे अपनी रचनात्मकता के अनुरूप नए उत्पाद तैयार कर सकें और उन्हें बाजार तक पहुंचा सकें. सरकार ने मार्केटिंग को आसान बनाने के लिए ओएनडीसी (Open Network for Digital Commerce) का मंच उपलब्ध कराया है. इस प्लेटफॉर्म पर बुनकर, कारीगर और स्वयं सहायता समूह बिना किसी अतिरिक्त खर्च के अपनी वर्चुअल दुकान शुरू कर सकते हैं. इससे उनके उत्पाद देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के खरीदारों तक पहुंच सकेंगे और उन्हें बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.
इस दौरान उन्होंने विभागीय अधिकारियों से कहा कि राजस्थान के स्थानीय डिजाइनरों का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फैशन डिजाइनरों से संवाद कराया जाए. देश-विदेश के प्रसिद्ध डिजाइनरों को राजस्थान बुलाकर यहां के बुनकरों और कारीगरों के कार्य से जोड़ा जाए ताकि पारंपरिक वस्त्रों और हस्तनिर्मित कपड़ों को आधुनिक फैशन और फ्यूजन डिजाइन के साथ वैश्विक बाजार में नई पहचान मिल सके. उन्होंने विश्वास जताया कि परंपरा और नवाचार के इस समन्वय से राजस्थान के हथकरघा उत्पादों की मांग और प्रतिष्ठा दोनों में वृद्धि होगी.
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