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डिजिटल अरेस्ट के नाम पर Cyber ठगी से रहें सतर्क, राजस्थान Police ने जारी की एडवाइजरी - Jagruk Janta Hindi News Paper

- ° सीबीआई के अभय पोर्टल से करें संदिग्ध नोटिस और वारंट का सत्यापन - ° पुलिस, सीबीआई या कोई भी जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर कभी गिरफ्तारी नहीं करती जयपुर। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बढ़ र…

Jagruk Janta के अनुसार17 अगस्त 2026 को 02:56 pm बजे
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर Cyber ठगी से रहें सतर्क, राजस्थान Police ने जारी की एडवाइजरी - Jagruk Janta Hindi News Paper

सौजन्य से:- Jagruk Janta

- ° सीबीआई के अभय पोर्टल से करें संदिग्ध नोटिस और वारंट का सत्यापन

- ° पुलिस, सीबीआई या कोई भी जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर कभी गिरफ्तारी नहीं करती

जयपुर। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बढ़ रहे साइबर अपराधों को देखते हुए आमजन के लिए एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी फर्जी कॉल, वीडियो कॉल, नोटिस या गिरफ्तारी के नाम पर डरने के बजाय सतर्कता बरतें और तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दें।

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम श्री वीके सिंह ने बताया कि साइबर अपराधियों द्वारा इन दिनों खुद को सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), कस्टम या एटीएस का अधिकारी बताकर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। ठग फर्जी वारंट, समन और नोटिस भेजकर लोगों को डराते हैं तथा वीडियो कॉल के माध्यम से उन्हें डिजिटल अरेस्ट का एहसास कराकर उनकी जमा पूंजी हड़प लेते हैं।

एडीजी श्री सिंह ने बताया कि इस प्रकार की धोखाधड़ी से बचाव के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अभय नामक एक एआई आधारित पोर्टल शुरू किया है, जहां नागरिक संदिग्ध पुलिस, न्यायालय या सीबीआई के नाम से भेजे गए नोटिस और वारंट की सत्यता की जांच कर सकते हैं।

ऐसे जाल में फंसाते हैं साइबर ठग

साइबर अपराधी फोन, व्हाट्सएप या वीडियो कॉल के माध्यम से लोगों से संपर्क करते हैं। वे दावा करते हैं कि पीड़ित के आधार कार्ड, बैंक खाते या मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किसी अवैध गतिविधि, जैसे मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला, मादक पदार्थों की तस्करी या किसी गैरकानूनी पार्सल भेजने में किया गया है।

इसके बाद ठग पुलिस स्टेशन या सीबीआई कार्यालय जैसा माहौल तैयार कर वीडियो कॉल करते हैं। वे फर्जी गिरफ्तारी वारंट और नोटिस भेजकर पीड़ित को धमकाते हैं तथा मामले को गोपनीय रखने का दबाव बनाते हैं।

साइबर अपराधी लोगों से बैंक खाते, एफडी और अन्य वित्तीय जानकारी प्राप्त कर उन्हें बताते हैं कि उनकी राशि अपराध से जुड़ी हो सकती है। इसके बाद सत्यापन के नाम पर पूरी धनराशि अपने खातों में ट्रांसफर करवा लेते हैं।

राजस्थान पुलिस ने दिए ये महत्वपूर्ण सुझाव

- किसी भी प्रकार की धमकी मिलने पर घबराएं नहीं।

- कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से गिरफ्तारी नहीं करती।

- आधार नंबर, पैन कार्ड, बैंक खाते की जानकारी और ओटीपी किसी के साथ साझा न करें।

- किसी भी संदिग्ध नोटिस या वारंट का सत्यापन अभय पोर्टल https://abhay.cbi.gov.in पर करें।

- याद रखें कि भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है।

यदि आप साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं तो तुरंत निकटतम पुलिस थाने या साइबर पुलिस स्टेशन से संपर्क करें। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in और साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930, साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

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