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जयपुर पुलिस के लिए अब परिवाद होगा प्राथमिकता, लगातार शिकायतों के बाद परिवाद निस्तारण के लिए DGP ने बनाई SOP

जयपुर : अब परिवाद लेकर परिवादी को SHO नहीं टरका पाएंगे. लगातार शिकायतों के बाद परिवाद निस्तारण के लिए DGP ने SOP बनाई है. एसओपी का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान Grievance Redressal Officer (GRO) की नियुक्ति की है. प्रत्येक जि…

First India News के अनुसार3 अगस्त 2026 को 11:17 am बजे
जयपुर पुलिस के लिए अब परिवाद होगा प्राथमिकता, लगातार शिकायतों के बाद परिवाद निस्तारण के लिए DGP ने बनाई SOP

सौजन्य से:- First India News

जयपुर : अब परिवाद लेकर परिवादी को SHO नहीं टरका पाएंगे. लगातार शिकायतों के बाद परिवाद निस्तारण के लिए DGP ने SOP बनाई है. एसओपी का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान Grievance Redressal Officer (GRO) की नियुक्ति की है. प्रत्येक जिला एवं रेंज स्तर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी को GRO बनाया जाएगा.

राजकॉप सिटीजन एप और CCTNS पर लंबित शिकायतों की नियमित निगरानी करेगा.तकनीकी रूप से दक्ष अधिकारी को यह जिम्मेदारी दी जाएगी तथा प्रत्येक माह लंबित परिवादों की समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी. प्रत्येक 3 माह में लंबित शिकायतों के मूल कारणों का विश्लेषण कर व्यवस्था में सुधार के सुझाव भी दिए जाएंगे. पुलिस मुख्यालय का मानना है कि नई SOP लागू होने से शिकायतों के निस्तारण में पारदर्शिता बढ़ेगी.

अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी और आमजन को समयबद्ध एवं प्रभावी न्याय मिलने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार होगा. नई व्यवस्था के तहत जिला एवं रेंज स्तर पर प्राप्त सभी शिकायतों का CCTNS में पंजीकरण अनिवार्य होगा. राजकॉप सिटीजन एप और CCTNS के माध्यम से प्राप्त परिवादों का 14 दिन के भीतर निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा.

पुलिस थानों, वृत्त, जिला और रेंज स्तर पर अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शिकायतों का समाधान स्थानीय स्तर पर ही किया जाए ताकि परिवादियों को पुलिस मुख्यालय तक अनावश्यक रूप से नहीं आना पड़े. यदि निर्धारित समय में शिकायत का समाधान नहीं हो सके तो परिवादी को अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी देना भी अनिवार्य होगा.

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