राजस्थान की नदियों में प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की पैनी नजर, राज्य सरकार को दिया ICG बनाने का निर्देश
राजस्थान की नदियों में प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की पैनी नजर, राज्य सरकार को दिया ICG बनाने का निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को एक एकीकृत सार्वजनिक रिपोर्टिंग और पर्यावरण संबंधी शिकायत निवारण तंत्र भी स्थापित कर…

सौजन्य से:- Hindustan
राजस्थान की नदियों में प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की पैनी नजर, राज्य सरकार को दिया ICG बनाने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को एक एकीकृत सार्वजनिक रिपोर्टिंग और पर्यावरण संबंधी शिकायत निवारण तंत्र भी स्थापित करने का निर्देश दिया, ताकि पर्यावरण के उल्लंघन और नदी के इकोसिस्टम को प्रभावित करने वाली संबंधित अवैध गतिविधियों की समय पर जानकारी दी जा सके।
राजस्थान की जोजरी, बांदी और लूनी नदियों में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक 'इंटीग्रेटेड कोऑर्डिनेशन ग्रुप' (ICG) यानी एकीकृत समन्वय समूह बनाने के निर्देश दिए हैं। शीर्ष अदालत ने यह निर्देश उस समय दिए, जब वह जोजरी नदी में प्रदूषण से जुड़े एक मामले में स्वतः संज्ञान (suo motu) लेते हुए सुनवाई कर रही थी, इसी दौरान उसका ध्यान बांदी और लूनी नदियों में प्रदूषण के मुद्दे पर भी दिलाया गया। इसके साथ ही अदालत ने एक व्यापक समाधान योजना तैयार करने के लिए ICG को तीन सप्ताह का समय भी दिया।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि रिपोर्ट से साफ पता चलता है कि नदी के इकोसिस्टम में भारी गिरावट आई है, जल निकायों में प्रदूषण फैला है, औद्योगिक कचरा अवैध रूप से छोड़ा जा रहा है, भूमि-उपयोग नियमन में कमियां हैं, और वन्यजीव आवासों की सुरक्षा तथा प्रभावित इकोलॉजी को बहाल करने से जुड़ी चुनौतियां हैं। ICG बनाने का निर्देश देते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि मुख्य सचिव इसमें इस मुद्दे से जुड़े राज्य के विभिन्न विभागों जैसे पर्यावरण, वन, जल संसाधन और उद्योग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी शामिल कर सकेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने बताया क्या होगी ICG पर जिम्मेदारी
अदालत ने कहा कि यह इंटीग्रेटेड कोऑर्डिनेशन ग्रुप पहले से गठित 'हाई-लेवल इकोसिस्टम ओवरसाइट कमेटी' के साथ विस्तृत विचार-विमर्श करेगा और इसका उद्देश्य कमेटी के साथ सलाह-मशविरा करके, पर्यावरण को नुकसान से बचाने, प्रदूषण कम करने, परिस्थितिकी संतुलन बहाल करने, नदी के इकोसिस्टम के संरक्षण, भूजल संसाधनों की सुरक्षा, जैव-विविधता को बचाने और नदी बेसिन मैनेजमेंट को संभालने वाले संस्थागत ढांचे को मजबूत करने के लिए एक व्यापक समाधान योजना तैयार करना रहेगा।
शीर्ष अदालत ने ICG को दिया तीन सप्ताह का समय
इसके साथ ही अदालत ने ICG को तीन सप्ताह का समय देते हुए कहा कि वह कमेटी के साथ उचित सलाह-मशविरा करने के बाद, एक व्यापक समाधान योजना तैयार करेगा और जमा करेगा। अदालत ने कहा कि इस समाधान योजना में स्पष्ट रूप से पहचाने गए एक्शन पॉइंट्स, लागू करने की समय-सीमा, निगरानी तंत्र और संबंधित विभागों व वैधानिक अथॉरिटीज की जिम्मेदारियां शामिल होंगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ICG राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव की देखरेख और अध्यक्षता में काम करेगा, जो समय-समय पर समाधान योजना के लागू होने की समीक्षा करेंगे और विभागों के बीच प्रभावी तालमेल सुनिश्चित करेंगे।
राज्य सरकार को दी नदी आयोग बनाने की सलाह
इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश देते हुए कहा कि 'राजस्थान राज्य एक स्वतंत्र और पर्याप्त अधिकार प्राप्त 'नदी आयोग' या 'नदी कायाकल्प प्राधिकरण' का गठन करेगा, जिसका काम नदियों, नदी बेसिन और कैचमेंट क्षेत्रों के संरक्षण, पुनरुद्धान और एकीकृत प्रबंधन की देखरेख करना होगा। इसमें हाई फ्लड लाइन (बाढ़ के अधिकतम स्तर की रेखा) का वैज्ञानिक निर्धारण और सीमांकन, नदी के इकोसिस्टम की सुरक्षा और पूरे राज्य में नदी बेसिन के कामकाज का समन्वित प्रबंधन करना शामिल होगा।'
पर्यावरण संबंधी शिकायत निवारण तंत्र बनाने को भी कहा
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को एक एकीकृत सार्वजनिक रिपोर्टिंग और पर्यावरण संबंधी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने का निर्देश भी दिया, ताकि पर्यावरण के उल्लंघन और नदी के इकोसिस्टम को प्रभावित करने वाली संबंधित अवैध गतिविधियों की समय पर जानकारी दी जा सके। अदालत ने कहा कि जिस किसी के पास भी नदी को प्रदूषित करने से जुड़ी भरोसेमंद जानकारी होगी, वह इस प्लेटफॉर्म के जरिए फोटो, वीडियो, जियो-टैग की गई अन्य जानकारी या जरूरत के हिसाब से कोई भी दूसरा इलेक्ट्रॉनिक मटीरियल अपलोड करके इन मामलों की रिपोर्ट कर सकेगा।
लेखक के बारे में
Sourabh Jainसौरभ जैन पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम में कार्यरत हैं। वह दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और गुजरात से जुड़े घटनाक्रम पर खबरें और विश्लेषण लिखते हैं।
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