देश में दुर्लभ खनिज खोज में राजस्थान का ऐतिहासिक कदम: बालोतरा-जोधपुर ब्लॉक के लिए जारी हुआ पहला लाइसेंस
यह महत्वपूर्ण लाइसेंस एक ऐसे ब्लॉक के लिए प्रदान किया गया है, जो राजस्थान के बालोतरा और जोधपुर दोनों जिलों की सीमाओं के अंतर्गत आता है। शुरुआती भूवैज्ञानिक अध्ययनों और सर्वे में इस क्षेत्र में दुर्लभ खनिजों की मौजूदगी के…

सौजन्य से:- Navbharat Times
यह महत्वपूर्ण लाइसेंस एक ऐसे ब्लॉक के लिए प्रदान किया गया है, जो राजस्थान के बालोतरा और जोधपुर दोनों जिलों की सीमाओं के अंतर्गत आता है। शुरुआती भूवैज्ञानिक अध्ययनों और सर्वे में इस क्षेत्र में दुर्लभ खनिजों की मौजूदगी के संकेत मिले हैं, जिसके बाद इस दिशा में तेजी से कदम उठाए गए हैं।
207 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में होगी खोज
अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह एक्सप्लोरेशन लाइसेंस कुल 207.6 वर्ग किलोमीटर के एक विशाल क्षेत्रफल के लिए दिया गया है। इस भू-भाग का विस्तार बालोतरा जिले की पचपदरा तहसील के नावाटाला देवीगढ़ क्षेत्र और जोधपुर जिले की शेरगढ़ तहसील तक फैला हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में व्यवस्थित और वैज्ञानिक तरीके से खोज कार्य किए जाने से यहां मौजूद दुर्लभ तत्वों के वास्तविक भंडार का सटीक आंकलन किया जा सकेगा। भविष्य में इस ब्लॉक के विकास के लिए यह लाइसेंस विस्तृत और पुख्ता भूवैज्ञानिक डेटा तैयार करने में मददगार साबित होगा।लैंथेनियम, सेरियम और नियोडिमियम जैसे कीमती तत्वों की संभावना
राज्य के खनन अधिकारियों ने बताया कि इस क्षेत्र में पूर्व में किए गए भूवैज्ञानिक अध्ययनों से यह संकेत मिले हैं कि यहां कई महत्वपूर्ण दुर्लभ पृथ्वी तत्व प्रचुर मात्रा में मिल सकते हैं। इनमें मुख्य रूप से लैंथेनियम, सेरियम, प्रेसीडिमियम और नियोडिमियम जैसे बेशकीमती तत्व शामिल हैं। आधुनिक तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन एनर्जी और रक्षा उपकरणों के निर्माण में इन तत्वों की भारी मांग रहती है।केंद्र की नई नीति और CMPDI को मिली जिम्मेदारी
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने देश में सामरिक रूप से महत्वपूर्ण खनिजों की खोज को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2024 में एक्सप्लोरेशन लाइसेंस के नए फ्रेमवर्क की शुरुआत की थी। इसके तहत खनिजों के ब्लॉकों की नीलामी का पहला दौर वर्ष 2025 में आयोजित किया गया था। इसी नीलामी प्रक्रिया के दौरान बालोतरा-जोधपुर के इस ब्लॉक को सफलतापूर्वक नीलाम किया गया था।यह ब्लॉक सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठित उपक्रम- सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (CMPDI) को आवंटित किया गया है।
आयात पर निर्भरता घटेगी और मजबूत होगी घरेलू सप्लाई चेन
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बड़ी सफलता पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजस्थान का इस नई व्यवस्था के तहत पहला एक्सप्लोरेशन लाइसेंस निष्पादित करना केंद्र की क्रिटिकल मिनरल्स पॉलिसी के क्रियान्वयन में एक ऐतिहासिक कदम है।विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से देश के क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होगा। इसके साथ ही, भारत की घरेलू सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी और भविष्य में विदेशी देशों पर दुर्लभ खनिजों के आयात की निर्भरता को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। हरित ऊर्जा और अत्याधुनिक तकनीकों के इस दौर में राजस्थान की यह पहल देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम अध्याय साबित होगी।
Powered by Reporting Rajasthan Files
संबंधित ख़बरें

राजस्थान नियामक ने बिहाइंड-द-मीटर कैप्टिव सोलर को आरपीओ से छूट देने की याचिका खारिज कर दी

राजस्थान बना देश का पहला राज्य, रेयर अर्थ एलिमेंट्स के लिए एक्सप्लोरेशन लाइसेंस पर अमल शुरू

राजस्थान को देश का पहला रेयर अर्थ एलिमेंट एक्सप्लोरेशन लाइसेंस


