भाषा की सरहदों से परे संगीत: अमेरिका के छात्रों ने सीखा राग यमन, राजस्थान के विद्यार्थियों ने जाना वेस्टर्न क्वायर का सुर
भाषा की सरहदों से परे संगीत: अमेरिका के छात्रों ने सीखा राग यमन, राजस्थान के विद्यार्थियों ने जाना वेस्टर्न क्वायर का सुर राजस्थान विश्वविद्यालय और कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी, फुलर्टन (अमेरिका) के संयुक्त तत्वावधान म…

सौजन्य से:- ETV Bharat
भाषा की सरहदों से परे संगीत: अमेरिका के छात्रों ने सीखा राग यमन, राजस्थान के विद्यार्थियों ने जाना वेस्टर्न क्वायर का सुर
राजस्थान विश्वविद्यालय और कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी, फुलर्टन (अमेरिका) के संयुक्त तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय संगीत आदान-प्रदान कार्यक्रम आयोजित किया गया.
Published : July 9, 2026 at 8:32 AM IST
जयपुर: संगीत की कोई भाषा नहीं होती, और न ही उसे सरहदों में बांधा जा सकता है. यह बात बुधवार को राजस्थान विश्वविद्यालय के संगीत विभाग में सच होती नजर आई. एक ओर अमेरिका के कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी के छात्र भारतीय शास्त्रीय संगीत के राग यमन की बंदिश सीखते दिखाई दिए, तो दूसरी ओर राजस्थान विश्वविद्यालय के विद्यार्थी वेस्टर्न क्वायर की हार्मनी और कोरल सिंग की बारीकियां समझ रहे थे. अलग-अलग देशों, भाषाओं और संस्कृतियों से आए छात्र जब एक ही सुर में गाने लगे तो पूरा परिसर सांस्कृतिक समरसता का प्रतीक बन गया.
राजस्थान विश्वविद्यालय के संगीत विभाग और कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी, फुलर्टन (अमेरिका) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगीत आदान-प्रदान कार्यक्रम में अमेरिका से 32 सदस्यीय 'यूनिवर्सिटी सिंगर्स क्वायर' और प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया. कार्यक्रम का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, शैक्षणिक और सांगीतिक सहयोग को नई दिशा देना रहा.
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जैज से राग यमन तक का सफर: कैलिफोर्निया से आई शिक्षिका टीना पीटरसन ने कहा कि संगीत वास्तव में एक यूनिवर्सल लैंग्वेज है. विश्वविद्यालय के अलग-अलग कमरों में अमेरिकी और भारतीय छात्र एक-दूसरे की संगीत परंपराओं को सीख रहे हैं. उन्होंने बताया कि उनके अधिकांश छात्र अब तक जैज संगीत से परिचित थे, लेकिन जयपुर आकर उन्होंने पहली बार भारतीय शास्त्रीय संगीत के राग सीखे. उन्हें राग यमन सीखने में विशेष आनंद आया क्योंकि जैज और भारतीय शास्त्रीय संगीत में इम्प्रोवाइजेशन यानी तत्काल रचना की समानता महसूस हुई. टीना ने बताया कि उनके संस्थान में भारत से जुड़े कई छात्र और परिवार हैं, इसलिए भारतीय संगीत से उनका जुड़ाव पहले से रहा है और यही वजह है कि भारत आकर इस संगीत को करीब से सीखना उनके लिए बेहद खास अनुभव है.
राग यमन की बंदिश गुनगुनाने लगे अमेरिकी छात्र: संगीत विभाग की सहायक आचार्य डॉ. अंशु वर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है. कैलिफोर्निया के छात्रों ने यहां के शिक्षकों और छात्रों से राग यमन सीखा और उसकी एक छोटी बंदिश भी पेश की. वहीं अमेरिकी क्वायर ग्रुप ने भारतीय छात्रों को वेस्टर्न कोरल सिंग और हार्मनी की तकनीक सिखाई. उन्होंने कहा कि संगीत की न तो कोई सीमा होती है और न ही कोई भाषा. जैसे ही विदेशी छात्रों ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को समझा, उन्होंने उसे अपने अंदाज में गाना शुरू कर दिया. यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान दोनों देशों के छात्रों के लिए सीखने का अनूठा अवसर है.
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'लाइफ चेंजिंग' रहा भारत आने का अनुभव: कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी में मास्टर्स के छात्र एलन ने कहा कि भारत आना उनके जीवन का यादगार अनुभव है. यहां आने से पहले वे काफी नर्वस थे कि कहीं कोई गलती न हो जाए, लेकिन राजस्थान विश्वविद्यालय के शिक्षकों और छात्रों ने उन्हें बेहद अपनापन दिया. उन्होंने बताया कि अब तक वे ओपेरा और ऑर्केस्ट्रा में प्रस्तुति देते रहे हैं, लेकिन भारतीय शास्त्रीय संगीत और रागों की दुनिया उनके लिए बिल्कुल नई है. अलग-अलग शिक्षकों से अलग-अलग राग सीखना उनके लिए एक नया और प्रेरणादायक अनुभव रहा.
विद्यार्थियों के लिए खुल सकते हैं नए अवसर: डॉ. अंशु वर्मा ने कहा कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम भविष्य में छात्र विनिमय यानी स्टूडेंट एक्सचेंज की संभावनाएं भी बढ़ाते हैं. यदि कैलिफोर्निया के छात्र राजस्थान आकर भारतीय संगीत सीख सकते हैं तो भविष्य में यहां के प्रतिभाशाली छात्रों को भी अमेरिका जाकर वहां की संगीत परंपराओं को सीखने का अवसर मिल सकता है. उन्होंने कहा कि संगीत प्रेम, सौहार्द और वैश्विक भाईचारे का सबसे प्रभावी माध्यम है और यही संदेश यह कार्यक्रम दे रहा है. कार्यक्रम में अमेरिका से आए यूनिवर्सिटी सिंगर्स क्वायर ने पश्चिमी कोरल संगीत की प्रस्तुति दी, जबकि राजस्थान विश्वविद्यालय और विभिन्न महाविद्यालयों के छात्रों ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर भारतीय संगीत विरासत की समृद्ध परंपरा से विदेशी मेहमानों को रूबरू कराया. लगभग 100 प्रतिभागियों की मौजूदगी वाला यह आयोजन भारत और अमेरिका के बीच सांस्कृतिक मैत्री का जीवंत उदाहरण बना.
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