जोधपुर में अजब लड़ाई... बीजेपी, कांग्रेस और निर्दलीय सब बराबर-बराबर
Sign In Advertisement X जोधपुर नगर निगम चुनाव का परिणाम बेहद दिलचस्प है. 100 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने 44-44 सीटें जीतकर मुकाबले को बराबरी पर रोक…

सौजन्य से:- AajTak
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जोधपुर नगर निगम चुनाव का परिणाम बेहद दिलचस्प है. 100 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने 44-44 सीटें जीतकर मुकाबले को बराबरी पर रोक दिया. लेकिन असली ट्विस्ट 10 निर्दलीय पार्षदों के नतीजे में है. इनमें भी पांच निर्दलीयों को भाजपा विचारधारा से जुड़ा माना जा रहा है, जबकि पांच कांग्रेस विचारधारा के करीब बताए जा रहे हैं. यानी यहां भी हिसाब 5-5 का है. अब नगर निगम की सत्ता किसके हाथ आएगी, इस पर सबकी नजर है.
जोधपुर नगर निगम चुनाव के नतीजों ने राजनीतिक दलों को जीत की खुशी के साथ-साथ नई चुनौती भी दे दी है. चुनाव में न भाजपा बहुमत तक पहुंच सकी और न कांग्रेस. दोनों दलों को बराबर 44-44 वार्डों में जीत मिली. वहीं 10 निर्दलीय और एक सीट राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के खाते में गई है. पहली नजर में मामला निर्दलीयों के पाले में जाता दिख रहा है, क्योंकि दोनों प्रमुख दल बहुमत से दूर हैं. लेकिन इन निर्दलीयों का राजनीतिक झुकाव भी तस्वीर को और दिलचस्प बना रहा है. 10 में से पांच को भाजपा विचारधारा से जुड़ा माना जा रहा है और पांच कांग्रेस विचारधारा से. ऐसे में जो मुकाबला 44-44 पर था, वह निर्दलीयों के बीच भी 5-5 की बराबरी पर आ गया है.
निर्दलीयों का 5-5 का समीकरण क्यों अहम?
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चुनाव से पहले पार्टियों के बीच मुकाबला वार्ड जीतने का था. नतीजे आने के बाद लड़ाई बोर्ड बनाने की हो गई है. भाजपा के पास 44 पार्षद हैं और कांग्रेस के पास भी 44. दोनों को अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए अतिरिक्त समर्थन की जरूरत है. ऐसे में 10 निर्दलीयों का महत्व अचानक बढ़ गया है. दिलचस्प बात यह है कि निर्दलीयों की संख्या भले ही 10 है, लेकिन उनके कथित राजनीतिक झुकाव ने दोनों दलों के लिए एक तरह से बराबरी का मैदान बना दिया है. पांच इधर, पांच उधर अब असली सवाल यह है कि कौन अपने पांच के साथ दूसरे खेमे से कितनों को साध पाता है. यही आने वाले दिनों में जोधपुर नगर निगम की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र रहने वाला है.
वार्ड 50 में अभी बाकी है एक और फैसला
जोधपुर नगर निगम के एक वार्ड का परिणाम अभी पूरी तरह साफ नहीं हुआ है. वार्ड संख्या 50 के एक मतदान केंद्र पर ईवीएम की डिस्प्ले में तकनीकी खराबी सामने आई थी. जिला कलेक्टर आलोक रंजन के मुताबिक, इंजीनियर ने मशीन को प्रमाणित किया है कि डिस्प्ले काम नहीं कर रही है और उसे अब खोला नहीं जा सकता. मामले को राज्य निर्वाचन आयोग को भेज दिया गया है. आयोग के निर्देश के बाद आगे की कार्रवाई होगी और संबंधित बूथ पर दोबारा मतदान कराया जाएगा. इसका मतलब यह भी है कि वार्ड 50 का अंतिम परिणाम सामने आने के बाद कुल राजनीतिक समीकरण में थोड़ा बदलाव संभव है.
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पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत के वार्ड में BJP की जीत
जोधपुर के चुनाव परिणाम में कुछ वार्ड ऐसे भी रहे, जिन्होंने राजनीतिक रूप से खासा ध्यान खींचा. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वार्ड संख्या 88 में मतदान किया था. इसी वार्ड से भाजपा के अशोक खींची ने जीत दर्ज की. दूसरी ओर वार्ड संख्या 56 में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और पूर्व राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत ने मतदान किया था. यहां कांग्रेस की पुष्पा देवी चुनाव जीतने में सफल रहीं. दोनों नतीजों ने यह दिखाया कि बड़े नेताओं के मतदान क्षेत्र में भी मतदाताओं ने स्थानीय समीकरणों और उम्मीदवारों के आधार पर अलग-अलग फैसला सुनाया.
छह नगरपालिकाओं में भी दिखा करीबी मुकाबला
जोधपुर जिले की छह नगरपालिकाओं के नतीजों में भी भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला. मथानिया में कांग्रेस ने 25 में से 16 वार्डों में जीत दर्ज की. भोपालगढ़ में कांग्रेस ने 25 में से 13 सीटें जीतीं. वहीं बिलाड़ा में भाजपा का प्रदर्शन मजबूत रहा. पार्टी ने 40 में से 24 वार्ड अपने नाम किए. तिंवरी में भाजपा ने 25 में से 13 सीटें जीतीं. पीपाड़ शहर में भी मुकाबला कांटे का रहा, जहां भाजपा को 14 और कांग्रेस को 12 वार्डों में जीत मिली. इस तरह जिले के अलग-अलग निकायों में मतदाताओं का रुख एकतरफा नहीं रहा.
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RLP ने खोला खाता, 1672 वोटों से जीत
इस चुनाव में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने भी जोधपुर नगर निगम में अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी है. वार्ड संख्या 66 से RLP उम्मीदवार मोहम्मद इरफान उर्फ राजू भाटी ने कांग्रेस के शेर मोहम्मद को 1672 मतों के अंतर से हराया. RLP के लिए यह जीत इसलिए भी अहम है क्योंकि पार्टी ने नगर निगम चुनाव में अपना खाता खोल लिया है. अब देखना होगा कि बोर्ड गठन के दौरान RLP की यह एक सीट क्या भूमिका निभाती है.
जोधपुर नगर निगम में निर्दलीय उम्मीदवारों के तौर पर जीतने वालों में वार्ड संख्या 5 से विशाल सांखला, वार्ड 19 से दिनेश शर्मा, वार्ड 20 से चेतन गहलोत, वार्ड 27 से कासम खान और वार्ड 29 से अफसाना बानो शामिल हैं. इसके अलावा वार्ड 47 से मोहन चौधरी, वार्ड 48 से दुर्गा मेवाड़ा, वार्ड 69 से लियाकत अली रंगरेज, वार्ड 76 से निर्मला नायक और वार्ड 81 से स्वरूप सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज की है. इन 10 नामों पर अब पूरे जोधपुर की राजनीतिक नजरें टिकी हैं. जोधपुर में मतदाताओं ने अपना फैसला सुना दिया है, लेकिन नगर निगम की सत्ता का फैसला अभी बाकी है.
भाजपा और कांग्रेस के बीच 44-44 की बराबरी ने मुकाबले को रोमांचक बना दिया है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि दोनों पार्टियों के संभावित निर्दलीय समर्थकों का आंकड़ा भी 5-5 बताया जा रहा है. ऐसे में किसी एक पक्ष के लिए रास्ता आसान नहीं है. वार्ड 50 के दोबारा मतदान के बाद तस्वीर थोड़ी बदल सकती है, लेकिन फिलहाल जोधपुर की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 44-44 की बराबरी के बाद कौन बनाएगा बोर्ड और किसके साथ जाएंगे वे 10 निर्दलीय, जिनमें भी 5-5 का राजनीतिक समीकरण दिखाई दे रहा है? यानी चुनाव का फैसला भले ही ईवीएम ने सुना दिया हो, लेकिन नगर निगम की सत्ता का अंतिम फैसला अब बातचीत की मेज पर तय होने की संभावना है.
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