मुखबिर प्रोत्साहन योजना: अवैध शराब की जानकारी दें, सरकार से पाएं मोटा इनाम
राजस्थान सरकार की मुखबिर प्रोत्साहन योजना के तहत विभाग ने वर्षों से लंबित 30 मामलों का निस्तारण करते हुए करीब 18 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि मंजूर की है। योजना का उद्देश्य अवैध शराब के कारोबार पर रोक लगाना और मुखबिर तंत…

सौजन्य से:- Navbharat Times
राजस्थान सरकार की मुखबिर प्रोत्साहन योजना के तहत विभाग ने वर्षों से लंबित 30 मामलों का निस्तारण करते हुए करीब 18 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि मंजूर की है। योजना का उद्देश्य अवैध शराब के कारोबार पर रोक लगाना और मुखबिर तंत्र को अधिक मजबूत बनाना है।
मुखबिर प्रोत्साहन योजना : राजस्थान में आबकारी विभाग ने अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने के लिए मुखबिर प्रोत्साहन योजना को तेजी से लागू किया है। आबकारी आयुक्त नमित मेहता के निर्देशन में विभाग ने कई वर्षों से लंबित 30 मामलों का अल्प समय में निस्तारण करते हुए लगभग 18 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की है। विभाग का मानना है कि इससे लोगों का भरोसा बढ़ेगा और अवैध शराब के खिलाफ गोपनीय सूचनाएं देने वालों की संख्या में भी इजाफा होगा।
मामलों के निस्तारण से बढ़ी कार्रवाई की रफ्तार
अप्रैल 2026 में कार्यभार संभालने के बाद आबकारी आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अवैध शराब के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई तेज की जाए और मुखबिर प्रोत्साहन योजना के लंबित मामलों का जल्द निपटारा किया जाए। नियमित समीक्षा के बाद राज्य के 10 जिलों से जुड़े 30 मामलों का निस्तारण किया गया। इससे न केवल लंबित फाइलें समाप्त हुईं, बल्कि मुखबिरों को समय पर प्रोत्साहन राशि भी मिल सकी।
अवैध शराब की जब्ती में साढ़े तीन गुना बढ़ोतरी
मुखबिरों की सक्रिय भागीदारी और विभाग की सख्त कार्रवाई का असर प्रदेश में साफ दिखाई दिया है। अप्रैल से जून 2026 के बीच आबकारी विभाग ने करीब 6.63 करोड़ रुपये की अवैध शराब जब्त की, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 1.80 करोड़ रुपये था। यानी इस वर्ष अवैध शराब की जब्ती में साढ़े तीन गुना से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विभाग का कहना है कि विश्वसनीय सूचनाओं के कारण कार्रवाई अधिक प्रभावी हुई है।
किन जिलों के मुखबिरों को मिला लाभ
मुखबिर प्रोत्साहन योजना के तहत श्रीगंगानगर, अलवर, डूंगरपुर, उदयपुर, सीकर, अजमेर, राजसमंद, चूरू, बीकानेर और झुंझुनूं जिलों के मुखबिरों को वर्षों से लंबित मामलों में करीब 18 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की गई है। योजना के नियमों के अनुसार यदि किसी मुखबिर की सूचना से 10 लाख रुपये या उससे अधिक की संभावित राजस्व हानि रोकी जाती है, तो सूचना देने वाले को अधिकतम 4 प्रतिशत तक इनाम दिया जा सकता है। हालांकि यह राशि अधिकतम 15 लाख रुपये तक सीमित रहती है। पूरी प्रक्रिया के दौरान मुखबिर की पहचान और सूचना को पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है।
लेखक के बारे मेंअमित कुमारअमित कुमार, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट एडिटर/सीनियर जर्नलिस्ट हैं। वर्तमान में सरकारी योजना सेक्शन के जरिए आम जनता तक कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचा रहे हैं। अमित कुमार की प्राथमिकता भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े हर सवाल का जवाब तथ्यों के आधार पर रीडर्स तक पहुंचाना है। अमित कुमार जनवरी, 2025 से नवभारत टाइम्स डिजिटल से जुड़े हैं। इसके साथ बिहार-झारखंड और राजस्थान टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। वह NBT Digital में सरकारी योजनाओं, बिहार-झारखंड और राजस्थान से संबंधित सेक्शन की प्लानिंग से लेकर तथ्यों पर आधारित ऐसे लेख तैयार कर रहे हैं, जो रीडर्स तक काम की जानकारी बिना बढ़ा-चढ़ाकर आसान भाषा में पहुंचा सकें।खबरें बिना सनसनी फैलाए पाठकों तक पहुंचाने पर उनका फोकस है। इन राज्यों की सियासी नब्ज को टटोलने के साथ-साथ आम लोगों की जरूरत की खबरों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। अपने 20 साल के करियर में अमित कुमार को पत्रकारिता जगत के अलग-अलग क्षेत्र में रिपोर्टिंग करने और आमजन के लिए उपयोगी खबरें लिखने का मौका मिला।अमित कुमार ने सितंबर, 2006 में खेल जगत में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत की। फिर देश के प्रमुख अखबारों से डिजिटल की दुनिया तक कई पड़ाव आए। इस दौरान नेशनल, इंटरनेशनल, देश के विभिन्न राज्यों की खबरों को लेकर न्यूज प्लानिंग, वैल्यू एडेड आर्टिकल्स, इन्फ्रोग्राफिक्स और स्पेशल दिनों के लिए कंटेंट तैयार करने का काम किया। अमित कुमार के करियर में भूमिकाएं तो कई बदलीं, लेकिन एक चीज स्थिर रही। आमजन के लिए उपयोगी खबरों को आसान से आसान भाषा में रीडर्स तक पहुंचाना।अपने करियर के दो दशक लंबे सफर के दौरान सटीक खबर, फैक्ट पर आधारित, इन-डेप्थ और नॉलेज से भरपूर कंटेंट रीडर्स तक पहुंचाना ही प्राथमिकता रही। उनका मानना है कि कोई भी जानकारी यूजर तक बिना वेरिफाई किए नहीं जानी चाहिए। इसलिए खबरों के लिए वह हमेशा ऑथेंटिक सोर्स पर भी भरोसा करते हैं।देश की राजधानी दिल्ली में ही जन्मे और पले-बढ़े अमित कुमार ने CBSE Board से 10वीं और 12वीं पास की। दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से ही हिंदी भाषा में M.A. किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में करियर संवारने की ख्वाहिश के चलते माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया। अमित कुमार शुरू से ही कुछ नया सीखने को लेकर आतुर रहे हैं। यही चीज उनके 2 दशक लंबे करियर में भी झलकती है।पत्रकारिता जगत में 20 साल का अनुभवअमित कुमार नवभारतटाइम्स.कॉम में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पिछले 20 साल में अमित कुमार को अमर उजाला, राजस्थान पत्रिका, दैनिक हिंदुस्तान, दैनिक जागरण, नई दुनिया, जनसत्ता और हरिभूमि जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में अपनी स्किल को संवारने का मौका मिला। 2019 में अमर उजाला के साथ डिजिटल का सफर शुरू किया। यहां नेशनल-इंटनेशनल खबरों पर इन-डेप्थ काम करते हुए सफर के अगले पड़ाव टीवी9 भारतवर्ष और न्यूज-24 बने। यहां न्यूज टीम को लीड किया।करियर के दौरान कॉमनवेल्थ गेम्स 2010, क्रिकेट वर्ल्ड कप 2011 और बैडमिंटन ओपन जैसे कई बड़े इवेंट्स में रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। देश-विदेश की बड़ी खबरों पर काम करते हुए अयोध्या राम मंदिर फैसला, लोकसभा चुनाव, विधानसभा चुनाव, बिहार और झारखंड विधानसभा चुनाव, बजट, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स कवर किए। अमित कुमार को पॉजिटिव इम्पैक्ट वाली स्टोरीज लिखना पसंद है। उनकी प्राथमिकता ऐसा कंटेंट लिखने की रहती है, जो लोगों के लिए मददगार साबित हों। अमित कुमार को लिखने और पढ़ने के साथ घूमने का शौक है। देश के छोटे-छोटे गांवों तक जाना वहां की जीवनशैली से रूबरू होना खासतौर से पसंद है।... और पढ़ें
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