अरावली में अवैध खनन पर एनजीटी का कड़ा रुख: राजस्थान सरकार और प्रशासन को दिए सख्त निर्देश
खनन अरावली में अवैध खनन पर एनजीटी का कड़ा रुख: राजस्थान सरकार और प्रशासन को दिए सख्त निर्देश अरावली में खनन गतिविधियों पर सख्ती बढ़ाते हुए एनजीटी ने नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई और लगाए गए पौधों की पांच साल तक देखभाल सु…

सौजन्य से:- Down to Earth- Hindi
खनन अरावली में अवैध खनन पर एनजीटी का कड़ा रुख: राजस्थान सरकार और प्रशासन को दिए सख्त निर्देश
अरावली में खनन गतिविधियों पर सख्ती बढ़ाते हुए एनजीटी ने नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई और लगाए गए पौधों की पांच साल तक देखभाल सुनिश्चित करने को कहा है।
सारांश
- राजस्थान की अरावली पहाड़ियों में अवैध खनन पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारियां तय की हैं।
- 8 सितंबर 2026 के आदेश में ट्रिब्यूनल ने खान एवं भूविज्ञान विभाग को रेत खनन से जुड़ी 2016 और 2020 की केंद्रीय दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन कराने को कहा है। पर्यावरणीय मंजूरी की शर्तों के खिलाफ परिवहन, मशीनों के इस्तेमाल या खनन की अनुमति नहीं होगी।
- अवैध खनन पर निगरानी के लिए जिला स्तरीय समितियों को नियमित औचक निरीक्षण करने और रिपोर्ट जिला कलेक्टर को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, खननकर्ताओं और परियोजना संचालकों को पर्यावरणीय मंजूरी के अनुपालन की रिपोर्ट राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को देनी होगी।
- एनजीटी ने ग्रामीणों के सार्वजनिक रास्तों को सुरक्षित रखने और खनन से हुई पर्यावरणीय कमियों को दूर करने पर भी जोर दिया है। खान विभाग को दो महीने में पौधरोपण कराने और लगाए गए पौधों को कम से कम पांच साल तक बचाए रखने की व्यवस्था करनी होगी। यदि उल्लंघन जारी रहा या सुधारात्मक कदम लागू नहीं हुए, तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कानूनी कार्रवाई करनी होगी।
- आदेश का संदेश साफ है—अरावली की कीमत पर खनन की छूट नहीं दी जा सकती।
राजस्थान के अरावली क्षेत्र में अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 8 सितंबर 2026 को कई अहम निर्देश जारी किए हैं। ट्रिब्यूनल ने खनन गतिविधियों की निगरानी कड़ी करने के साथ-साथ पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन पर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।
ट्रिब्यूनल ने खान एवं भूविज्ञान विभाग को रेत खनन से संबंधित सस्टेनेबल सैंड माइनिंग मैनेजमेंट गाइडलाइंस, 2016 और एनफोर्समेंट एंड मॉनिटरिंग गाइडलाइंस फॉर सैंड माइनिंग, 2020 का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
खनन क्षेत्र में परिवहन, मशीनों के इस्तेमाल और रेत खनन की गतिविधियां पर्यावरणीय मंजूरी (ईसी) में तय शर्तों के अनुरूप ही होनी चाहिए।
अरावली में खनन पर निगरानी होगी सख्त
इसके साथ ही अदालत ने अवैध खनन पर नियंत्रण के लिए गठित जिला स्तरीय समिति को जिले में नियमित रूप से औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। समिति को इन निरीक्षणों की रिपोर्ट समय-समय पर जिला कलेक्टर को सौंपनी होगी, ताकि नियमों के मुताबिक जरूरी कार्रवाई की जा सके।
एनजीटी ने परियोजना संचालकों और खननकर्ताओं को भी पर्यावरणीय मंजूरी की शर्तों का पालन करने के बाद इसकी रिपोर्ट नियमित रूप से राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (आरएसपीसीबी) को देने को कहा है।
ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि खनन गतिविधियों के कारण गांवों के सार्वजनिक रास्तों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। ग्रामीणों के नियमित आवागमन में किसी तरह की बाधा नहीं डाली जा सकती। संयुक्त समिति के निरीक्षण में सामने आई पर्यावरणीय कमियों को भी दूर करना होगा। इसके साथ ही नियमों के अनुसार वृक्षारोपण और खनन क्षेत्र की सीमा का स्पष्ट सीमांकन किया जाना जरूरी है।
दो महीने में पौधारोपण, पांच साल तक बचाने की जिम्मेदारी
एनजीटी ने खान एवं भूविज्ञान विभाग को पौधारोपण के लिए जमीन उपलब्ध कराने और दो महीने के भीतर पौधरोपण पूरा कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि लगाए गए पौधों को केवल रोपना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनकी देखभाल और जीवित रहने की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी।
ट्रिब्यूनल ने पौधों की कम से कम पांच साल तक निगरानी और देखभाल करने को कहा है, ताकि पौधारोपण सफल हो सके। इसके लिए नियमित सिंचाई और पानी की पर्याप्त व्यवस्था भी करनी होगी।
नियम टूटे तो प्रदूषण बोर्ड करेगा कार्रवाई
एनजीटी ने राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पर्यावरणीय मंजूरी की शर्तों के अनुपालन की नियमित निगरानी करने और कमियों को दूर करने के लिए जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया है।
ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि यदि नियमों का उल्लंघन जारी रहता है या सुधार के लिए सुझाए कदम सही तरीके से लागू नहीं किए जाते, तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कानून के तहत दंडात्मक कार्रवाई करनी होगी।
एनजीटी के इन निर्देशों का उद्देश्य अरावली जैसे संवेदनशील पारिस्थितिकी क्षेत्र में खनन गतिविधियों को नियमों के दायरे में लाना और अवैध खनन से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान पर प्रभावी रोक लगाना है।
Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in
Powered by Reporting Rajasthan Files
संबंधित ख़बरें

राजस्थान युवा कांग्रेस अध्यक्ष पद का परिणाम जारी: 6 लाख से ज्यादा वोट लेकर अभिषेक चौधरी सबसे आगे

ACTION PLAN : सीएम भजनलाल शर्मा आज करेंगे नवनिर्वाचित निकाय प्रमुखों से संवाद, तय होगा 100 दिन का रोडमैप

From the edge of extinction, two captive-bred Great Indian Bustards released into wild in Rajasthan


