राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बड़ा फिजिकल इंस्पेक्शन; जर्जर भवन और अतिरिक्त शिक्षक रडार पर
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बड़ा फिजिकल इंस्पेक्शन; जर्जर भवन और अतिरिक्त शिक्षक रडार पर प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के निर्देश के बाद बड़े और पुराने सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपल को आसपास के सरकारी स्कूलों के निरीक्षण की ज…

सौजन्य से:- Hindustan
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बड़ा फिजिकल इंस्पेक्शन; जर्जर भवन और अतिरिक्त शिक्षक रडार पर
प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के निर्देश के बाद बड़े और पुराने सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपल को आसपास के सरकारी स्कूलों के निरीक्षण की जिम्मेदारी दी गई है। शहरी क्षेत्रों में यूसीईईओ और ग्रामीण क्षेत्रों में पीईईओ निरीक्षण की निगरानी करेंगे।
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में मंगलवार को एक साथ फिजिकल इंस्पेक्शन किया जाएगा। शिक्षा विभाग के निर्देश पर प्रदेशभर में अधिकारियों और स्कूल प्रभारियों की टीमें सरकारी स्कूलों में पहुंचकर भवन, कक्षा-कक्ष, पेयजल, शौचालय, पोषाहार कक्ष और जल निकासी समेत आधारभूत सुविधाओं का भौतिक सत्यापन करेंगी। निरीक्षण के दौरान स्कूलों में छात्र संख्या के मुकाबले शिक्षकों की स्थिति भी जांची जाएगी।
जहां जरूरत से ज्यादा शिक्षक पाए जाएंगे, उन्हें चिन्हित कर जरूरत वाले स्कूलों में लगाने के प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे। इन प्रस्तावों को 27 अगस्त सुबह 11 बजे तक संबंधित सीबीईओ को भेजना होगा। वहीं स्कूलों में जर्जर भवन या अन्य गंभीर समस्याएं मिलने पर इसकी जानकारी शिक्षा अधिकारियों के जरिए जिला प्रशासन और कलेक्टर तक पहुंचाई जाएगी।
बड़े स्कूलों के प्रिंसिपल करेंगे आसपास के स्कूलों का निरीक्षण
प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के निर्देश के बाद बड़े और पुराने सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपल को आसपास के सरकारी स्कूलों के निरीक्षण की जिम्मेदारी दी गई है। शहरी क्षेत्रों में यूसीईईओ और ग्रामीण क्षेत्रों में पीईईओ निरीक्षण की निगरानी करेंगे।
टीमें स्कूल में मौजूद छात्रों और शिक्षकों की संख्या का मिलान करेंगी। छात्र-शिक्षक अनुपात के आधार पर यह देखा जाएगा कि किस स्कूल में शिक्षकों की जरूरत है और कहां स्वीकृत पदों की तुलना में अधिक शिक्षक कार्यरत हैं। अतिरिक्त शिक्षकों को जरूरत वाले स्कूलों में लगाने के लिए प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे।
जर्जर भवन मिला तो तुरंत देनी होगी सूचना
फिजिकल इंस्पेक्शन के दौरान स्कूल भवन की स्थिति पर विशेष फोकस रहेगा। टीम प्रत्येक कक्षा-कक्ष और भवन का निरीक्षण करेगी। दीवारों में सीलन, दरार, छत या पट्टियों के क्षतिग्रस्त होने और भवन के जर्जर होने जैसी स्थिति मिलने पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
जर्जर भवन के कारण यदि कोई स्कूल दूसरे सरकारी या निजी भवन में संचालित हो रहा है तो वहां भी विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जांच होगी। कक्षा-कक्ष, पेयजल और शौचालय की स्थिति को रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।
पेयजल, शौचालय और जलभराव की भी जांच
निरीक्षण सिर्फ भवन तक सीमित नहीं रहेगा। स्कूल परिसर में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था, छात्र-छात्राओं के लिए शौचालय, पोषाहार कक्ष, छत की सफाई और जल निकासी व्यवस्था भी देखी जाएगी।
बारिश के कारण स्कूल परिसर या आसपास जलभराव मिलने पर अधिकारियों को पानी निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। खास तौर पर उन स्कूलों की स्थिति देखी जाएगी जहां बारिश के दौरान बच्चों और स्टाफ को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
27 अगस्त तक शाला दर्पण पर अपडेट होगा पूरा रिकॉर्ड
फिजिकल वेरिफिकेशन के बाद स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी सभी जानकारी शाला दर्पण के इंफ्रास्ट्रक्चर मॉड्यूल में अपडेट की जाएगी। इसके लिए 27 अगस्त की समय सीमा तय की गई है।
निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली समस्याओं को संबंधित स्तर पर दर्ज किया जाएगा। पीईईओ या यूसीईईओ स्तर पर समाधान नहीं होने वाली गंभीर समस्याओं की सूचना सीबीईओ के माध्यम से मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी तक भेजी जाएगी।
गंभीर समस्या पर कलेक्टर तक पहुंचेगी रिपोर्ट
शिक्षा विभाग ने निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली गंभीर समस्याओं के समाधान के लिए जिम्मेदारी भी तय की है। यदि किसी समस्या का समाधान पीईईओ या यूसीईईओ स्तर पर संभव नहीं है तो मामला सीबीईओ के माध्यम से मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी तक जाएगा। जरूरत पड़ने पर मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी कलेक्टर को इसकी जानकारी देकर समस्या का समाधान करवाएंगे।
इस निरीक्षण का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं की वास्तविक स्थिति सामने लाना और जरूरत के अनुसार संसाधनों का वितरण करना है। खास तौर पर अतिरिक्त शिक्षकों को जरूरत वाले स्कूलों में भेजने और जर्जर भवनों समेत बुनियादी समस्याओं की पहचान पर विभाग का फोकस रहेगा।
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