होम›शिक्षा-करियर›जिस रवींद्र मंच ने कलाकारों को पहचान दी, आज वही बदहाली का शिकार, सरकार को दिया एक महीने का अल्टीमेटम
शिक्षा-करियर

जिस रवींद्र मंच ने कलाकारों को पहचान दी, आज वही बदहाली का शिकार, सरकार को दिया एक महीने का अल्टीमेटम

जिस रवींद्र मंच ने कलाकारों को पहचान दी, आज वही बदहाली का शिकार, सरकार को दिया एक महीने का अल्टीमेटम रविंद्र मंच की स्थापना 1961 में हुई थी और 15 अगस्त 1963 को इसका औपचारिक उद्घाटन किया गया. Published : August 29, 2026 a…

ETV Bharat के अनुसार29 अगस्त 2026 को 11:32 am बजे
जिस रवींद्र मंच ने कलाकारों को पहचान दी, आज वही बदहाली का शिकार, सरकार को दिया एक महीने का अल्टीमेटम

सौजन्य से:- ETV Bharat

जिस रवींद्र मंच ने कलाकारों को पहचान दी, आज वही बदहाली का शिकार, सरकार को दिया एक महीने का अल्टीमेटम

रविंद्र मंच की स्थापना 1961 में हुई थी और 15 अगस्त 1963 को इसका औपचारिक उद्घाटन किया गया.

Published : August 29, 2026 at 3:40 PM IST

जयपुर : राजस्थान की राजधानी जयपुर में रवींद्र मंच कभी सिर्फ एक सभागार नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक धड़कन हुआ करता था. दशकों तक यहां नाटक, संगीत, नृत्य और साहित्यिक आयोजनों की ऐसी परंपरा चली, जिसने जयपुर ही नहीं बल्कि देशभर को कई जाने-माने कलाकार दिए. आज वही रविंद्र मंच बदहाली और उपेक्षा की तस्वीर पेश कर रहा है. मंच की जर्जर हालत, खराब एसी-पंखे, असुविधाजनक शौचालय और बदहाल ग्रीन रूम को लेकर कलाकारों ने पहले क्रमिक अनशन के जरिए और अब सरकार को एक महीने का अल्टीमेटम देते हुए सोशल मीडिया पर आवाज बुलंद की है.

कलाकारों के लिए मंदिर रहा है रवींद्र मंच : रामनिवास बाग परिसर में स्थित रविंद्र मंच की स्थापना 1961 में हुई थी और 15 अगस्त 1963 को इसका औपचारिक उद्घाटन किया गया. पंडित जवाहरलाल नेहरू की सांस्कृतिक सोच के अनुरूप विकसित किए गए इस मंच ने जयपुर के रंगमंच को नई पहचान दी. कई दशक तक यहां देश के नामचीन रंगकर्मी और कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देते रहे. असरानी, इरफान खान, ओम शिवपुरी और इला अरुण जैसे कलाकारों का जुड़ाव भी इस मंच से रहा है. ओम शिवपुरी, मोहन महर्षि, भानु भारती, वासुदेव सिंह और राम पांडे जैसे रंगकर्मियों ने भी रविंद्र मंच की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया. यही वजह है कि कलाकार आज भी इसे महज एक इमारत नहीं, बल्कि कलाकारों का मंदिर और जयपुर की सांस्कृतिक विरासत मानते हैं.

पढे़ं. जयपुर का रविंद्र मंच जिसने सैकड़ों 'सपनों' को दी उड़ान, आज गुमनामी की जिंदगी जी रहा

अब मंच पर बुनियादी सुविधाओं का भी संकट : संयुक्त कलाकार अभियान के संयोजक अमित शर्मा का आरोप है कि रवींद्र मंच लंबे समय से उपेक्षा का शिकार है. हॉल में एसी और पंखों की व्यवस्था ठीक नहीं है. गर्मी के बीच दर्शकों और कलाकारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. शौचालय और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं बताई जा रही है. ग्रीन रूम की हालत भी कलाकारों को परेशान कर रही है. टूटे शीशे, खराब अलमारियां और जर्जर व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए अब प्रशासन को एक महीने का समय दिया गया है.

रवींद्र मंच की मौजूदा तस्वीर :

- हॉल में एसी और पंखों की खराब व्यवस्था

- दर्शकों के लिए पर्याप्त और बेहतर टॉयलेट सुविधा का अभाव

- ग्रीन रूम में टूटे शीशे और अलमारियां

- इमारत की जर्जर स्थिति

- कलाकारों के लिए पर्याप्त सुविधाओं का अभाव

- तकनीकी और आधारभूत संसाधनों की कमी

पढे़ं. 67 साल पुराना है पारस शैली नाटक 'महाराजा भर्तृहरि', घूमता सिंहासन व शीशमहल बना खास पहचान

सोशल मीडिया पर शुरू हुई मुहिम : रवींद्र मंच की बदहाली को लेकर राजस्थान और जयपुर से जुड़े कलाकारों ने सोशल मीडिया पर अभियान शुरू किया है. कलाकारों की मांग है कि मंच का जीर्णोद्धार कर इसे आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाए ताकि नई पीढ़ी के रंगकर्मियों को बेहतर मंच मिल सके. इसी मांग को लेकर रंगकर्मियों की ओर से क्रमिक अनशन भी किया गया. हालांकि, आचार संहिता लागू होने के चलते फिलहाल आंदोलन को रोकना पड़ा है. अब रंगकर्मियों ने सरकार को करीब एक महीने का समय दिया है. उनका कहना है कि यदि इस अवधि में सरकार की ओर से ठोस कदम नहीं उठाया गया तो प्रदेशभर में आंदोलन तेज किया जाएगा.

कलाकारों ने ये रखी प्रमुख मांगें :

- रवींद्र मंच का विशेषज्ञों की निगरानी में तत्काल संपूर्ण जीर्णोद्धार

- रिक्त पदों पर आवश्यक कर्मचारियों की नियुक्ति

- कॉफी हाउस, स्ट्रीट लाइट, पार्किंग और यातायात सुविधाओं का विकास

- कला एवं संस्कृति विभाग में अनुभवी विशेषज्ञों की सलाहकार के रूप में नियुक्ति

- जवाहर कला केंद्र का बजट बढ़ाने और कर्मचारियों की कमी दूर करने की मांग

- कलाकारों को ऑडिटोरियम बुकिंग पर रियायत

- प्रभावी गवर्निंग काउंसिल का गठन

- राजस्थान संगीत नाटक अकादमी का पुनर्गठन और रिक्त पदों पर नियमित भर्ती

- राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता और पारदर्शिता

- सभी प्रमुख सांस्कृतिक संस्थाओं में रिक्त पदों पर शीघ्र नियमित भर्ती

- कला एवं संस्कृति विभाग का बजट बढ़ाने की मांग.

इला अरुण बोलीं- यहीं से कई बड़े कलाकार उभरे : अभिनेत्री और रंगकर्मी इला अरुण ने रवींद्र मंच की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि जयपुर से लगातार फोन आ रहे हैं और वहां काम कर रहे युवा रंगकर्मी मंच की हालत को लेकर बेहद परेशान हैं. रवींद्र मंच कलाकारों के लिए एक मंदिर रहा है. रवींद्रनाथ टैगोर के नाम पर बना ये मंच एक विरासत है, जहां बड़े-बड़े नाटक हुए और देश के कई बड़े कलाकारों ने काम किया. रामनिवास बाग में अल्बर्ट हॉल, चिड़ियाघर और अन्य महत्वपूर्ण स्थलों के बीच खड़ा रविंद्र मंच ऐसी जगह है, जहां से कई कलाकार उभरे हैं.

पढे़ं. वर्ल्ड थिएटर डे : जयपुर का पहला नाटक भवन रामप्रकाश थिएटर, शानदार अतीत, लेकिन वर्तमान धुंधला

साहित्य और कला समाज का दर्पण : इला अरुण ने कहा कि ये बात टालने वाली नहीं है. सरकार और संस्कृति विभाग को इस ओर ध्यान देना चाहिए. पुराने कलाकारों के साथ-साथ आज के युवा कलाकार भी चाहते हैं कि रवींद्र मंच पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हों. कलाकारों को वहां बैठने, सीखने और अपनी कला को निखारने के लिए उचित वातावरण मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि साहित्य और कला समाज का दर्पण हैं, इसीलिए युवा कलाकारों को ऐसी जगह मिलनी चाहिए, जहां उन्हें अपनी कला को विकसित करने का अवसर मिले.

बासु सोनी बोले- रवींद्र मंच की हालत देखकर होता है दुख : रंगकर्मी बासु सोनी ने कहा कि उन्होंने खुद अपने नाट्य सफर की शुरुआत जयपुर के रविंद्र मंच से की थी. जब उन्होंने मेच्योर थिएटर करना शुरू किया, तब भी रवींद्र मंच से ही जुड़ाव रहा. हाल ही में जयपुर आने पर रवींद्र मंच की हालत देखकर बेहद दुख हुआ. कलाकारों ने बताया कि मंच की ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है. उन्होंने सरकार से इस मामले में संज्ञान लेकर जल्द कार्रवाई करने की अपील की है. बासु सोनी ने जवाहर कला केंद्र के बजट में कमी और संगीत नाटक अकादमी में स्टाफ की कमी का भी जिक्र करते हुए कहा कि सरकार को कला और कलाकारों के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए.

पढे़ं. वर्ल्ड थियेटर डे : थियेटर सेल में तराशे जा रहे रंगकर्मी, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जा चुके हैं कई कलाकार

विजय कुमार बोले- रंगकर्मियों की मांग समाज से जुड़ी हुई : अभिनेता विजय कुमार ने कहा कि जयपुर में कला, संस्कृति, साहित्य और परफॉर्मिंग आर्ट्स के लिए रविंद्र मंच का ऐतिहासिक महत्व रहा है. देश की कई राजधानियों में रवींद्र मंच बनाए गए थे और उन्होंने खुद जयपुर सहित कई शहरों के मंचों पर प्रस्तुति दी है, लेकिन जयपुर का रवींद्र मंच तकनीकी रूप से बेहद समृद्ध मंच रहा है. ऐसे मंच रंगकर्मियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि हर कलाकार के पास अपने काम को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए संसाधन नहीं होते. रवींद्र मंच ने ऐसे कलाकारों को अपनी प्रतिभा दर्शाने का अवसर दिया है. विजय कुमार के मुताबिक आज ये मंच बेहद जीर्ण-शीर्ण स्थिति में पहुंच गया है. उन्होंने सरकार से रंगकर्मियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और रवींद्र मंच के पुनरुद्धार के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की.

Powered by Reporting Rajasthan Files

संबंधित ख़बरें