राजस्थान हाईकोर्ट ने फ़र्ज़ी क्लीयरेंस सर्टिफ़िकेट से इंटर्नशिप पाने के आरोपी विदेशी MBBS ग्रेजुएट की ज़मानत याचिका खारिज की
राजस्थान हाईकोर्ट ने फ़र्ज़ी क्लीयरेंस सर्टिफ़िकेट से इंटर्नशिप पाने के आरोपी विदेशी MBBS ग्रेजुएट की ज़मानत याचिका खारिज की Shahadat 11 July 2026 10:04 AM IST राजस्थान हाईकोर्ट ने कई विदेशी MBBS ग्रेजुएट को ज़मानत देने…

सौजन्य से:- Live Law Hindi
राजस्थान हाईकोर्ट ने फ़र्ज़ी क्लीयरेंस सर्टिफ़िकेट से इंटर्नशिप पाने के आरोपी विदेशी MBBS ग्रेजुएट की ज़मानत याचिका खारिज की
Shahadat
11 July 2026 10:04 AM IST
राजस्थान हाईकोर्ट ने कई विदेशी MBBS ग्रेजुएट को ज़मानत देने से इनकार किया। इन पर आरोप है कि इन्होंने फ़र्ज़ी 'फ़ॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन' (FMGE) क्लीयरेंस सर्टिफ़िकेट का इस्तेमाल करके सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में ज़रूरी इंटर्नशिप हासिल की थी। [2026 LiveLaw (Raj) 276]
जस्टिस रवि चिरानिया की बेंच ने कहा,
"हालांकि याचिकाकर्ता छात्र हैं, लेकिन FMGE के फ़र्ज़ी सर्टिफ़िकेट का इस्तेमाल करने की उनकी स्वीकार की गई हरकत साफ़ तौर पर दिखाती है कि प्रोफ़ेशनल डिग्री होने के बावजूद उन्होंने ऊपर बताई गई गंभीर हरकत की, जिसे मौजूदा तथ्यों और हालात में हल्के में नहीं लिया जा सकता।"
बता दें, याचिकाकर्ताओं ने कजाकिस्तान, जॉर्जिया जैसे विदेशी देशों से MBBS की डिग्री हासिल की थी, जिस पर कोई विवाद नहीं था। तय प्रक्रिया के अनुसार, ज़रूरी इंटर्नशिप पाने और उसके बाद मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए उन्हें FMGE पास करना ज़रूरी था।
आरोप है कि याचिकाकर्ता कई कोशिशों के बाद भी FMGE पास नहीं कर पाए और एक ऐसे गिरोह के संपर्क में आए, जो फ़र्ज़ी क्लीयरेंस सर्टिफ़िकेट देता था। याचिकाकर्ताओं ने इंटर्नशिप पाने के लिए इन सर्टिफ़िकेट का इस्तेमाल किया।
जब मामले की जानकारी मिली और जांच शुरू हुई तो उनमें से कई लोगों ने अपने सर्टिफ़िकेट नष्ट कर दिए और संबंधित अस्पताल से अपनी इंटर्नशिप वापस ले ली। हालांकि, उनके ख़िलाफ़ FIR दर्ज की गई और उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि उनका आचरण इतना गंभीर नहीं है, क्योंकि उस समय उनका स्टेटस सिर्फ़ एक स्टूडेंट का है और उन्होंने अपनी डिग्री का प्रोफ़ेशनल तौर पर गलत इस्तेमाल नहीं किया।
इसके विपरीत, राज्य ने कहा कि याचिकाकर्ताओं का आचरण गंभीर प्रकृति का है, क्योंकि उन्होंने फ़र्ज़ी सर्टिफ़िकेट के आधार पर प्रोफ़ेशनल डॉक्टर के तौर पर प्रैक्टिस करने की योजना बनाई, जिससे आम लोगों की जान को खतरा हो सकता है।
आगे यह भी दलील दी गई कि मामला अभी जांच के दायरे में है और ऐसे फ़र्ज़ी सर्टिफ़िकेट रखने के आरोप में कई और लोगों को गिरफ़्तार किया जा सकता है। इसलिए याचिकाकर्ताओं के ऐसे गंभीर आचरण को देखते हुए उनकी ज़मानत याचिकाएं स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।
दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने ज़मानत याचिकाएं खारिज कीं।
Title: Shubham Gurjar v State of Rajasthan, and other connected petitions
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