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सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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ग्राउंड रिपोर्टजयपुर-अलवर में ट्रेंड बदलने की संभावना कम, भरतपुर चौंकाएगा:भाजपा को सत्ता में होने का फायदा, जेन-जी और यूजीसी मुद्दे को भुनाना चाहेगी कांग्रेस
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जयपुर में 150, भरतपुर में 65 और नए बने अलवर निगम में 65 वार्ड हैं। जयपुर-अलवर में बीजेपी मजबूत दिख रही है। भरतपुर में निर्दलीय किंगमेकर की भूमिका में रहते हैं। पिछली बार कांग्रेस का बोर्ड था। इस बार ट्रेंड बदल सकता है।
बीजेपी को सरकार में होने और शहरों में अपने मजबूत परंपरागत वोट बैंक से उम्मीद है, लेकिन जेन-जी और यूजीसी मुद्दे पर सवर्ण संगठनों की नाराजगी की चिंता भी है। कांग्रेस सरकार के खिलाफ बने माहौल को भुनाने के प्रयास में है।
पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
जयपुर
स्थानीय समस्याओं के साथ जेन-जी फैक्टर, यूजीसी कानून तय करेंगे वोटिंग पैटर्न
चुनावों में स्थानीय समस्याओं के साथ ही 2 और चीजें चर्चा में हैं। जेन-जी अपने मुद्दों पर मुखर हैं। वहीं सवर्ण संगठनों की नाराजगी भी चर्चा में है। दोनों मुद्दों पर बीजेपी डैमेज कंट्रोल में लगी है।
150 वार्डों के परिसीमन के बाद सियासी और जातीय समीकरण बदल गए हैं। बीजेपी को सत्ता में होने का फायदा मिल सकता है। वहीं, सत्ताधारी पार्टी के विधायकों को लेकर कई जगह स्थानीय नाराजगी भी उभरने का खतरा है।
कांग्रेस ने इस बार ज्यादातर नए चेहरों को मौका दिया है। इनमें कई जेन–जी हैं। वहीं, बीजेपी ने परकोटे में 8 मुस्लिम उम्मीदवार उतारकर नया सियासी दांव खेला है। बागियों ने दोनों पार्टियों की चिंता बढ़ाई हुई है।
निगम के सबसे बड़े मुद्दे
- ट्रैफिक जाम और खराब सड़कें
- परकोटे और बाजारों में पार्किंग समस्या
- आउटर कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाओं की कमी, कामों की धीमी रफ्तार
भरतपुर
कांटे की टक्कर, कांग्रेस-बीजेपी ने 8 वार्ड खाली छोड़े
भरतपुर में त्रिकोणीय मुकाबला है। बीजेपी और कांग्रेस ने 65 वार्ड में से 57 वार्डों में ही टिकट दिया है। 8 सीटें खाली छोड़ी हैं। कई सीटों पर भरतपुर विधायक सुभाष गर्ग की टीम के लोग चुनाव लड़ रहे हैं, वहां बीजेपी ने किसी भी प्रत्याशी को टिकट नहीं दिया है।
आरएलडी केंद्र में बीजेपी के साथ गठबंधन में है, लेकिन यहां गर्ग ने खुद अपनी लाइन ले रखी है। गर्ग पिछली बार आरएलडी कोटे से गहलोत सरकार में मंत्री थे।
वार्ड 19 में कांग्रेस–बीजेपी ने एक ही प्रत्याशी कांग्रेस से पार्षद रह चुके मनोज सिंह को टिकट दिया। मनोज सिंह ने बीजेपी से लड़ने का फैसला किया। कांग्रेस ने उन्हें निष्काषित कर दिया।
भरतपुर में हमेशा से त्रिकोणीय मुकाबला होता आया है। सीएम के गृह जिले की नगर निगम होने के कारण बीजेपी के रणनीतिकारों ने भी खास फोकस किया है।
निगम के 3 सबसे बड़े मुद्दे
- नगर निगम होने के बावजूद सड़क, ड्रेनेज, सीवरेज की दिक्कतें बरकरार।
- पानी का जमाव हर मौसम में रहता है, अब तक समाधान नहीं।
- पूरा शहर खुदा हुआ है, लंबे समय से काम अटके हैं।
अलवर
भ्रष्टाचार बड़ा मुद्दा, निगम के खिलाफ धरने पर बैठने वाले मंत्री की प्रतिष्ठा दांव पर
अलवर नगर निगम चुनावों में स्थानीय विधायक और वन राज्य मंत्री संजय शर्मा की प्रतिष्ठा दांव पर है। पिछले दिनों नगर निगम में सफाईकर्मियों की भर्ती नहीं होने के मुद्दे पर संजय शर्मा अफसरों के खिलाफ धरने पर बैठे गए थे।
उस धरने को कांग्रेस ने मुद्दा बना रखा है। संजय शर्मा के लिए ये चुनाव उनकी सियासी प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है। केंद्रीय वन पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के लिए भी यह चुनाव काफी अहम है।
वहीं नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का भी गृह जिला है। कांग्रेस नेता भंवर जितेंद्र सिंह और जूली का सियासी पर्सेप्शन इन चुनावी नतीजों पर निर्भर रहेगा।
अलवर के नगर परिषद से निगम बनने के बाद यह पहला चुनाव है। पिछली बार नगर परिषद थी, तब भी 65 वार्ड थे। नगर निगम में भ्रष्टाचार बड़ा मुद्दा है।
निगम के 3 सबसे बड़े मुद्दे
- सफाई की खराब व्यवस्था, आउटर कॉलोनियों में रेगुलर सफाई नहीं होती
- गर्मियों में पानी की भारी किल्लत रहती है
- ड्रेनेज सिस्टम खराब है, बारिश में कई कॉलोनियों और बाजारों में पानी भर जाता है।
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कोटा नगर निगम में 100, अजमेर–बीकानेर में 80-80 और भीलवाड़ा में 70 वार्ड हैं। अभी तक के समीकरणों में चारों निगम में भाजपा मजबूत दिख रही है, हालांकि मुकाबला एकतरफा भी नहीं है। पूरी खबर पढ़िए…
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जोधपुर नगर निगम में 100, उदयपुर में 80 और पाली में 65 वार्ड हैं। फिलहाल समीकरणों में जोधपुर और पाली में कांग्रेस-बीजेपी में टक्कर है। उदयपुर में बीजेपी मजबूत दिख रही है, लेकिन मुकाबला एकतरफा नहीं होगा। पूरी खबर पढ़िए…
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