Rajasthan: कैंसर मरीजों की सरकारी दवा ब्लैक मार्केट में कैसे पहुंची? RMSCL खंगालेगा राजस्थान का सप्लाई नेटवर्क
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सौजन्य से:- Amar Ujala
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Rajasthan: कैंसर मरीजों की सरकारी दवा ब्लैक मार्केट में कैसे पहुंची? RMSCL खंगालेगा राजस्थान का सप्लाई नेटवर्क
Thu, 20 Aug 2026 07:05 AM IST
Sourabh Bhatt
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर/बीकानेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर/बीकानेर
Published by: Sourabh Bhatt
Updated Thu, 20 Aug 2026 07:05 AM IST
सार
Rajasthan News: दवा के अस्पताल तक पहुंचने के बाद उसके सुरक्षित इस्तेमाल और रिकॉर्ड की जिम्मेदारी संबंधित अस्पताल या मेडिकल कॉलेज की होती है। ऐसे में इस मामले में संबंधित मेडिकल कॉलेज से भी जवाब मांगा गया है कि सरकारी दवा ब्लैक मार्केट तक कैसे पहुंची।
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विस्तार
कैंसर मरीजों की सरकारी दवा ब्लैक मार्केट में मिलने से हडकंप मच गया है। बीकानेर के आचार्य तुलसी रीजनल रिसर्च कैंसर इंस्टीटयूट में कैसर मरीजों के उचार में इस्तेमाल होने वाले सरकारी इंजेक्शन के दिल्ली के ब्लैक मार्केट में मिलने के मामले में राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉपरेशन लिमिटेड(RMSCL) ने जांच शुरू कर दी है। निगम ने मामले में पड़ताल के लिए जांच कमेटी गठित की है जो जिलों में जाकर रिकॉर्ड खंगाल रही है।
RMSCL के एमडी पुखराज सेन ने बताया कि दिल्ली में मिले इंजेक्शन की सप्लाई को लेकर राजस्थान में जांच शुरू कर दी गर्ठ है। प्रदेश में जहां-जहां संबंधित दवा की सप्लाई हुई है, वहां की पूरी सप्लाई चेन को जांच के दायरे में लिया गया है। उन्होंने बताया कि दवा सप्लाई के लिए प्रदेश में करीब 40 वेयरहाऊस बनाए गए हैं और इन्हीं के माध्यम से अस्पतालों तक दवा पहुंचाई जाती हैं।
महंगी दवाओं के इस्तेमाल का रिकॉर्ड जरूरी
पुखराज सेन ने बताया कि महंगी दवाओं की कालाबाजारी की आशंका को देखते हुए दवाओं की खरीद और इस्तेमाल के संबंध में नियम बनाए जाते हैं। वर्ष 2002 में जारी सर्कुलर के अनुसार 3 हजार रुपए या इससे अधिक कीमत की दवा जारी किए जाने पर उसका रिकॉडे संबंधित मेडिकल कॉलेज के प्रिसिंपल को रखना अनिवार्य किया गया है।
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उन्होंने कहा कि दवा के अस्पताल तक पहुंचने के बाद उसके सुरक्षित इस्तेमाल और रिकॉर्ड की जिम्मेदारी संबंधित अस्पताल या मेडिकल कॉलेज की होती है। इस मामले में संबंधित मेडिकल कॉलेज से भी जवाब मांगा गया है कि सरकारी दवा ब्लैक मार्केट तक कैसे पहुंची।
यह भी पढें- राजस्थान में स्कूलों को लेकर सियासत तेज: सीजेपी के आशुतोष करेंगे स्कूलों का दौरा, शिक्षा मंत्री को दी चुनौती
पकड़ा गया इंजेक्शन RMSCL ने सप्लाई किया था या नहीं, इसकी भी जांच
RMSCL अब यह भी पता लगा रहा है कि दिल्ली में पकड़ा गया इंजेक्शन वास्तव में निगम की ओर से सप्लाई किया गया था या नहीं। पुखराज सेन के मुताबिक कई मामलों में ऐसा सामने आया है कि जिस बैच की दवा के बारे में जानकारी दी गई, वह बैच RMSCL की ओर से सप्लाई ही नहीं किया गया था।
ऐसे में जांच में दवा के बैच नंबर, सप्लाई की तारीख और संबंधित अस्पताल तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया को शामिल किया गया है। जांच कमेटी यह भी पता लगाएगी कि दवा RMSCL के वेयरहाउस से किस अस्पताल को और कब भेजी गई थी तथा अस्पताल में उसके इस्तेमाल और स्टॉक का रिकॉर्ड क्या है।
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RMSCL के एमडी पुखराज सेन ने बताया कि दिल्ली में मिले इंजेक्शन की सप्लाई को लेकर राजस्थान में जांच शुरू कर दी गर्ठ है। प्रदेश में जहां-जहां संबंधित दवा की सप्लाई हुई है, वहां की पूरी सप्लाई चेन को जांच के दायरे में लिया गया है। उन्होंने बताया कि दवा सप्लाई के लिए प्रदेश में करीब 40 वेयरहाऊस बनाए गए हैं और इन्हीं के माध्यम से अस्पतालों तक दवा पहुंचाई जाती हैं।
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महंगी दवाओं के इस्तेमाल का रिकॉर्ड जरूरी
पुखराज सेन ने बताया कि महंगी दवाओं की कालाबाजारी की आशंका को देखते हुए दवाओं की खरीद और इस्तेमाल के संबंध में नियम बनाए जाते हैं। वर्ष 2002 में जारी सर्कुलर के अनुसार 3 हजार रुपए या इससे अधिक कीमत की दवा जारी किए जाने पर उसका रिकॉडे संबंधित मेडिकल कॉलेज के प्रिसिंपल को रखना अनिवार्य किया गया है।
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उन्होंने कहा कि दवा के अस्पताल तक पहुंचने के बाद उसके सुरक्षित इस्तेमाल और रिकॉर्ड की जिम्मेदारी संबंधित अस्पताल या मेडिकल कॉलेज की होती है। इस मामले में संबंधित मेडिकल कॉलेज से भी जवाब मांगा गया है कि सरकारी दवा ब्लैक मार्केट तक कैसे पहुंची।
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पकड़ा गया इंजेक्शन RMSCL ने सप्लाई किया था या नहीं, इसकी भी जांच
RMSCL अब यह भी पता लगा रहा है कि दिल्ली में पकड़ा गया इंजेक्शन वास्तव में निगम की ओर से सप्लाई किया गया था या नहीं। पुखराज सेन के मुताबिक कई मामलों में ऐसा सामने आया है कि जिस बैच की दवा के बारे में जानकारी दी गई, वह बैच RMSCL की ओर से सप्लाई ही नहीं किया गया था।
ऐसे में जांच में दवा के बैच नंबर, सप्लाई की तारीख और संबंधित अस्पताल तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया को शामिल किया गया है। जांच कमेटी यह भी पता लगाएगी कि दवा RMSCL के वेयरहाउस से किस अस्पताल को और कब भेजी गई थी तथा अस्पताल में उसके इस्तेमाल और स्टॉक का रिकॉर्ड क्या है।
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