कभी फर्जी पुलिसकर्मी तो कभी RTU प्रोफेसर; जयपुर में दबोचा बहुरूपिया ठग
कभी फर्जी पुलिसकर्मी तो कभी RTU प्रोफेसर; जयपुर में दबोचा बहुरूपिया ठग कोटा जिले में इटावा के पास स्थित नोनेरा एबरा बांध में पानी की आवक बढ़ने के बाद मंगलवार को 27 में से 19 गेट खोल दिए गए। बांध से करीब 4 लाख 15 हजार क्य…

सौजन्य से:- Hindustan
कभी फर्जी पुलिसकर्मी तो कभी RTU प्रोफेसर; जयपुर में दबोचा बहुरूपिया ठग
कोटा जिले में इटावा के पास स्थित नोनेरा एबरा बांध में पानी की आवक बढ़ने के बाद मंगलवार को 27 में से 19 गेट खोल दिए गए। बांध से करीब 4 लाख 15 हजार क्यूसेक पानी कालीसिंध नदी में छोड़ा जा रहा है।
जेल की सलाखों के पीछे जाना हर अपराधी को सबक सिखा दे, यह जरूरी नहीं। कुछ ऐसे भी होते हैं जो जेल से बाहर आते ही पुराने तरीके छोड़कर ठगी का नया किरदार गढ़ लेते हैं। जयपुर पुलिस ने ऐसे ही एक शातिर ठग को गिरफ्तार किया है, जो हर बार अपनी पहचान बदलकर लोगों को अपना शिकार बनाता था। कभी वह राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी (RTU) का प्रोफेसर बन जाता, तो कभी खुद को पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को मुकदमे में फंसाने की धमकी देता। सोशल मीडिया पर नया नाम और नई आईडी बनाना उसकी ठगी की पहली सीढ़ी थी।
मुहाना थाना पुलिस ने ब्रह्मपुरी निवासी अरुण शर्मा को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी पहले भी ठगी के कई मामलों में गिरफ्तार होकर करीब पांच बार जेल जा चुका है। जमानत पर बाहर आने के बाद वह फिर नया नाम और नया किरदार अपनाकर ठगी शुरू कर देता था।
फेसबुक पर बना RTU का प्रोफेसर, 62 हजार ऐंठे
मामले की शुरुआत मुहाना थाने में दर्ज एक शिकायत से हुई। ललित गहलोत ने पुलिस को बताया कि फेसबुक पर उन्हें एक व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली। सामने वाले ने खुद को राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी का प्रोफेसर बताया। फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने के बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई।
आरोपी ने ललित से कहा कि अगर किसी स्टूडेंट के नंबर बढ़वाने हों या यूनिवर्सिटी से जुड़ा कोई काम करवाना हो तो उससे संपर्क किया जा सकता है। इसी बहाने उसने ललित से 62 हजार रुपए ले लिए। जब ललित को ठगी का अहसास हुआ और उसने पैसे वापस मांगे तो आरोपी ने अपना दूसरा किरदार सामने रख दिया।
62 हजार के बाद पुलिस अफसर बनकर घर पहुंचा
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने खुद को गांधी नगर थाने में तैनात पुलिस अधिकारी बताते हुए ललित के घर पहुंचकर डराना शुरू कर दिया। उसने आरोप लगाया कि RTU में फर्जी तरीके से काम करवाने की कोशिश की गई है और इस मामले में जेल भेज दिया जाएगा।
मुकदमे और जेल का डर दिखाकर आरोपी ने ललित से 60 हजार रुपए और ऐंठ लिए। यानी एक ही व्यक्ति ने पहले प्रोफेसर बनकर 62 हजार लिए और फिर पुलिसकर्मी बनकर 60 हजार और वसूल लिए।
100 से ज्यादा CCTV खंगाले, तब खुला राज
मुहाना थाना प्रभारी मुकेश कुमार खारड़िया ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की गहराई से जांच शुरू की। आरोपी की पहचान के लिए 100 से ज्यादा CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली गई। तकनीकी साक्ष्यों और जांच के आधार पर पुलिस ब्रह्मपुरी निवासी अरुण शर्मा तक पहुंची।
पुलिस की स्पेशल टीम ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में उसके खिलाफ सामने आई वारदातों का सिलसिला लंबा निकला। पुलिस ने इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया।
नाम बदलना और नई ID बनाना था ठगी का तरीका
पुलिस के अनुसार, अरुण शर्मा सोशल मीडिया पर अपनी पहचान लगातार बदलता रहता था। कभी दातार सिंह, कभी सुनील शर्मा, कभी सुनील मीणा और कभी विजय शर्मा के नाम से फेसबुक अकाउंट और पेज बनाता था। अलग-अलग लोगों से संपर्क करते समय वह अलग-अलग पेशे और पद का इस्तेमाल करता था।
किसी के सामने नौकरी लगवाने वाला व्यक्ति बनता तो किसी के सामने पुलिस का स्पेशल स्टाफ। वहीं यूनिवर्सिटी से जुड़े लोगों को नंबर बढ़वाने और काम करवाने का झांसा देता था।
नौकरी से लेकर सट्टे और बिटकॉइन तक… 13 वारदातें सामने
पुलिस जांच में आरोपी से जुड़ी 13 ठगी की वारदातें सामने आई हैं। इनमें ब्रह्मपुरी के गिर्राज सिंह से नौकरी लगवाने के नाम पर 2.50 लाख, गलता गेट के सुभाष से 1.50 लाख और नाहरगढ़ के विजय से फर्जी पुलिसकर्मी बनकर 25 हजार रुपए ऐंठने का आरोप है।
रामनगरिया के दो लोगों से RTU में नंबर बढ़ाने के नाम पर 62 हजार और 34 हजार रुपए लिए गए। मानसरोवर की अनु सिंधी से खुद को CST स्पेशल स्टाफ का पुलिसकर्मी बताकर सट्टे का मुकदमा बनाने की धमकी दी और 90 हजार रुपए ऐंठे। सांगानेर के राहुल सिंह से भी इसी तरह 60 हजार रुपए लेने का आरोप है।
इसके अलावा एक मेडिकल संचालक, स्पा सेंटर, नर्सिंग ऑफिसर, यूनिवर्सिटी से जुड़े व्यक्ति और श्याम नगर की एक युवती को भी आरोपी ने अलग-अलग किरदार और बहानों से ठगा। पुलिस के मुताबिक, बिटकॉइन के पैसे निकलवाने के नाम पर भी युवती से 50 हजार रुपए लिए गए।
जेल से बाहर आते ही फिर बदल लेता था किरदार
पुलिस का कहना है कि अरुण पहले भी पांच मामलों में गिरफ्तार होकर जेल जा चुका है। लेकिन जमानत पर बाहर आने के बाद उसने अपना तरीका नहीं बदला। वह नया नाम, नई सोशल मीडिया आईडी और नया किरदार तैयार करता और फिर ठगी शुरू कर देता।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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