उदयपुर में अरावली संरक्षण पर कमेटी के सामने सुनवाई में उमड़ी भीड़, पर्यावरणविदों ने सख्त संरक्षण की उठाई मांग - udaipur aravalli conservation public dialogue demands
उदयपुर में अरावली संरक्षण पर कमेटी के सामने सुनवाई में उमड़ी भीड़, पर्यावरणविदों ने सख्त संरक्षण की उठाई मांग उदयपुर में अरावली संरक्षण और 100 मीटर की नई परिभाषा पर सुप्रीम कोर्ट निर्देशित हाईलेवल कमेटी ने जनसंवाद किया।…

सौजन्य से:- Jagran
उदयपुर में अरावली संरक्षण पर कमेटी के सामने सुनवाई में उमड़ी भीड़, पर्यावरणविदों ने सख्त संरक्षण की उठाई मांग
उदयपुर में अरावली संरक्षण और 100 मीटर की नई परिभाषा पर सुप्रीम कोर्ट निर्देशित हाईलेवल कमेटी ने जनसंवाद किया। ...और पढ़ें
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट निर्देशित हाईलेवल कमेटी ने उदयपुर में जनसंवाद किया।
- पर्यावरणविदों ने अरावली के लिए सख्त संरक्षण नियमों की मांग की।
- जनप्रतिनिधियों और खनन उद्यमियों ने संतुलित नीति पर जोर दिया।
जागरण संवाददाता, उदयपुर। अरावली पर्वतमाला के संरक्षण और 100 मीटर की नई परिभाषा को लेकर सोमवार को उदयपुर में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशन में गठित हाईलेवल कमेटी का जनसंवाद हुआ। जिला परिषद सभागार में दो घंटे तक चली बैठक में विभिन्न जिलों से आए पर्यावरणविद, जनप्रतिनिधि, खनन पट्टाधारक, आदिवासी संगठनों आदि के प्रतिनिधि शामिल रहे।
बैठक में आए लोगों को अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिलने पर विरोध भी हुआ। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) की महानिदेशक कंचन देवी की अध्यक्षता वाली समिति ने सुझाव और आपत्तियां सुनीं तथा ज्ञापन भी एकत्र किए।
उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन ने कहा कि अरावली प्राकृतिक और ऐतिहासिक धरोहर है। उन्होंने कहा कि अवैध खनन पर कठोर कार्रवाई के साथ वैध गतिविधियों और संरक्षण में अंतर जरूरी है।
उदयपुर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा ने खनन प्रभावित लोगों की समस्याओं के समाधान तथा बंद खदानों को हरियाली और पर्यावरण संरक्षण के लिए विकसित करने का सुझाव दिया। नाथद्वारा विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ ने अरावली के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को संरक्षित करने पर जोर दिया। खनन उद्यमियों ने भी अरावली संरक्षण को जरूरी बताते हुए खनिज संसाधनों का संरक्षण, रोजगार और खनन के बीच संतुलित नीति की मांग की।
पर्यावरणविदों ने की सख्त नियमों की मांगपर्यावरणविद डॉ. अनिल मेहता ने अरावली के लिए समान नीति की मांग की। पद्मश्री श्याम सुंदर पालीवाल ने अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाने की बात कही। झील प्रेमी तेजशंकर पालीवाल ने संरक्षण के लिए नियम सख्त करने तथा पर्यावरण विशेषज्ञ सुनील दूबे ने अरावली कमीशन गठित करने का सुझाव दिया।
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