उदयपुर के जंगलों में 'ऑपरेशन शंकर'! 11.76 करोड़ का 7500 से ज्याादा गांजे के पौधे देख NCB भी दंग, किया नष्ट
'ऑपरेशन शंकर' के तहत NCB और राजस्थान पुलिस ने उदयपुर के कोटड़ा में 9.4 बीघा में फैली 11.76 करोड़ रुपये की अवैध गांजे की खेती (7,577 पौधे) नष्ट की। 'दिसंबर 2027 मिशन' के तहत राज्य में निगरानी सख्त करते हुए पटवारियों-कलेक्…

सौजन्य से:- Navbharat Times
'ऑपरेशन शंकर' के तहत NCB और राजस्थान पुलिस ने उदयपुर के कोटड़ा में 9.4 बीघा में फैली 11.76 करोड़ रुपये की अवैध गांजे की खेती (7,577 पौधे) नष्ट की। 'दिसंबर 2027 मिशन' के तहत राज्य में निगरानी सख्त करते हुए पटवारियों-कलेक्टरों को 48 घंटे में रिपोर्ट सौंपने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
Rajasthan Narcotics dept Action। उदयपुर: एनसीबी जोधपुर, एएनटीएफ राजस्थान और राजस्थान पुलिस की टीमों ने संयुक्त अभियान 'ऑपरेशन शंकर' के तहत उदयपुर जिले की कोटरा तहसील के नयावास गांव में बड़े पैमाने पर अवैध गांजे की खेती का भंडाफोड़ किया। इस अभियान के दौरान, अधिकारियों ने 9.4 बीघा भूमि पर फैले लगभग 7,577 गांजे के पौधों का पता लगाया और उन्हें नष्ट कर दिया।
2,273 किलोग्राम गांजा मिला
अधिकारियों ने अनुमान लगाया कि इससे लगभग 2,273 किलोग्राम गांजा प्राप्त हो सकता है, जिसका बाजार मूल्य लगभग 11.76 करोड़ रुपए है। एनसीबी जोधपुर ने इस मामले में अपराध संख्या 07/2026 दर्ज की है और आगे की जांच जारी है। राज्य में अवैध मादक फसलों की खेती को खत्म करने के लिए चल रहे प्रयासों के बीच यह कड़ी निगरानी की जा रही है।
दिसंबर 2027 मिशन के तहत एक्शन
यह कार्रवाई मादक पदार्थों पर नियंत्रण संबंधी राष्ट्रीय विजन दस्तावेज के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य केंद्रीय और राज्य एजेंसियों, जिला प्रशासनों और स्थानीय समुदायों को शामिल करते हुए निरंतर प्रवर्तन, रोकथाम उपायों और समन्वित प्रयासों के माध्यम से दिसंबर 2027 तक चिन्हित क्षेत्रों में अवैध भांग और अफीम की खेती को समाप्त करना है।
राजस्थान में बढ़ाई निगरानी
एनसीबी के एक बयान में कहा गया कि राजस्थान ने निगरानी बढ़ाकर, राजस्व अधिकारियों पर रिपोर्टिंग की सख्त जिम्मेदारी लागू करके और संवेदनशील क्षेत्रों में प्रवर्तन अभियान तेज करके मादक फसलों की अवैध खेती पर अपनी कार्रवाई को और कड़ा कर दिया है। नए निर्देशों के तहत, पटवारियों को गिरदावरी के दौरान नियमित रूप से अपने अधिकार क्षेत्र का निरीक्षण करने और मादक फसलों की किसी भी संदिग्ध खेती की सूचना तुरंत संबंधित गिरदावर और तहसीलदार को देने का निर्देश दिया गया है।
ऐसी सूचना प्राप्त होने पर, गिरदावरों को मौके पर जाकर सत्यापन करना होगा और भूमि अभिलेखों, भूस्वामी की पहचान, खेती के प्रकार और सीमा, इसमें शामिल व्यक्तियों और मामले में पहले की गई किसी भी कार्रवाई का विवरण देते हुए एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
राजस्थान के जिला कलेक्टरों को मिले निर्देश
राज्य सरकार ने इन रिपोर्टों को पता चलने के 48 घंटों के भीतर एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) को भेजना अनिवार्य कर दिया है। अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि रिपोर्ट करने में किसी भी प्रकार की विफलता या देरी को गंभीर लापरवाही माना जाएगा और इसके परिणामस्वरूप अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है। जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया गया है कि वे निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें और नियमित निगरानी तंत्र बनाए रखें।
लेखक के बारे मेंखुशेंद्र तिवारीखुशेंद्र तिवारी नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर कंटेट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में राजस्थान के लिए कवर करते हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों की राजनीति की खबरें कवर करते हैं। खुशेंद्र तिवारी पत्रकारिता की शुरुआत समाचार पत्र से की। बीते 6 सालों से डिजिटल मीडिया के लिए काम कर रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 15 सालों का अनुभव है। समाचार पत्र में पहले रिपोर्टिंग और बाद में डेस्क पर काम किया। साल 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत । राजस्थान की राजनीति, सामाजिक और अपराध की खबरें कवर करता हैं । डेस्क के साथ-साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है । अभी तक राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर, शिक्षा और कला जैसे विषयों पर काम किया है। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय की है। प्रिंट में काम करने के बाद पिछले छह साल से डिजिटल में नए एक्सपीरियंस के साथ लर्निंग जारी है।
विशेषता: ब्यूरोक्रेसी, पॉलिटिक्ल, आर्ट एंड कल्चर, एजुकेशन और अपराध की खबरों में विशेष दिलचस्पी है। बड़े घटनाक्रमों पर अलग-अलग एंगलों से खबरें लिखना। ओपिनियन लिखना।
पत्रकारिता का अनुभव: पत्रकारिता में कुल 15 सालों का अनुभव है। पत्रकारिता में दिलचस्पी और शुरुआत अखबारों में छोटे- छोटे लेख भेजकर की। इसके बाद इसी क्षेत्र में पोस्ट ग्रेजुएशन कर विधिवत रूप से राजस्थान पत्रिका में फील्ड रिपोर्टिंग की। सबसे पहले आर्ट एंड कल्चर, इसके बाद एजुकेशन की फील्ड में काम किया। \ रिपोर्टिंग के बाद डेस्क के अनुभव को भी समझा।... और पढ़ें
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