ब्रिक्स सम्मेलन 2026: जयपुर में निर्मला सीतारमण बोलीं- निजी पूंजी जुटाने में विकास बैंकों की भूमिका अहम
ब्रिक्स सम्मेलन 2026: जयपुर में निर्मला सीतारमण बोलीं- निजी पूंजी जुटाने में विकास बैंकों की भूमिका अहम ब्रिक्स वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की से दो दिवसीय सेमिनार का आगाज हुआ. Published : August 12, 2026 a…

सौजन्य से:- ETV Bharat
ब्रिक्स सम्मेलन 2026: जयपुर में निर्मला सीतारमण बोलीं- निजी पूंजी जुटाने में विकास बैंकों की भूमिका अहम
ब्रिक्स वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की से दो दिवसीय सेमिनार का आगाज हुआ.
Published : August 12, 2026 at 6:23 PM IST
जयपुर: भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत ब्रिक्स वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की सेमिनार (FMCBG) बुधवार से शुरू हुई. दो दिवसीय इस महत्वपूर्ण सेमिनार में ब्रिक्स सदस्य देशों के वित्त मंत्री, केंद्रीय बैंक के गवर्नर और वित्तीय क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए. बैठक के पहले दिन केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक अर्थव्यवस्था के विकास के प्रमुख इंजन हैं.
वित्त मंत्री ने कहा कि बड़े पैमाने पर निजी पूंजी जुटाने के मामले में इन देशों के सामने कई समान संरचनात्मक चुनौतियां हैं. ऐसे में बहुपक्षीय विकास बैंकों की भूमिका केवल वित्त उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें निवेश के जोखिम को कम करने, परियोजनाओं को बैंक योग्य बनाने और निजी निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी. द रोल ऑफ द न्यू डेवलपमेंट बैंक इन मोबिलाइजिंग प्राइवेट कैपिटल इन मेंबर कंट्रीज विषय पर आयोजित सेमिनार में न्यू डेवलपमेंट बैंक की अध्यक्ष डिल्मा रूसेफ ने विशेष संबोधन किया. आर्थिक कार्य विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर और फिक्की के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विजय शंकर सहित विभिन्न देशों के वरिष्ठ नीति निर्माता, वित्तीय संस्थानों और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे.
इसे भी पढे़ं- बारिश की फुव्वारों के बीच आमेर महल घूमे ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधि...जानिए कैसे जताई भावनाएं
सार्वजनिक पूंजी निजी निवेश का विकल्प नहीं, उत्प्रेरक बने: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत के अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने लगातार सार्वजनिक पूंजीगत व्यय और संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से देश के बुनियादी ढांचे के इकोसिस्टम को मजबूत किया है. पिछले एक दशक में सार्वजनिक निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. इसका उद्देश्य राजमार्ग, रेलवे, बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल अवसंरचना और ऊर्जा नेटवर्क जैसी उत्पादक राष्ट्रीय परिसंपत्तियों का निर्माण करना है. उन्होंने कहा कि सरकार का दृष्टिकोण स्पष्ट है कि सार्वजनिक पूंजी को निजी निवेश का विकल्प नहीं, बल्कि निजी निवेश के लिए उत्प्रेरक के रूप में काम करना चाहिए. इसी सोच के तहत सरकार ने आर्थिक रूप से सीमित लेकिन सामाजिक रूप से उपयोगी परियोजनाओं के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण यानी वीजीएफ, सड़क क्षेत्र में जोखिम साझा करने के लिए हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल और परियोजनाओं की बैंक योग्यता बढ़ाने के लिए क्रेडिट संवर्धन जैसे उपाय किए हैं.
इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को बढ़ाने के लिए कई मॉडल: सीतारमण ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट यानी इनविट्स के माध्यम से पूंजी के पुन: उपयोग और दीर्घकालिक संस्थागत निवेशकों को आकर्षित करने का प्रयास किया गया है. वहीं, नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन निवेशकों को दीर्घकालिक स्पष्टता उपलब्ध कराती है. पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के जरिए मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, बेहतर समन्वय और परियोजनाओं की कार्यक्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया है. उन्होंने बताया कि केंद्रीय बजट 2026-27 में निजी क्षेत्र के निवेश को गति देने के लिए कई लक्षित प्रावधान किए गए हैं. इनमें नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, नए राष्ट्रीय जलमार्ग और तटीय कार्गो प्रोत्साहन योजना जैसे कदम शामिल हैं.
इसे भी पढे़ं- जयपुर में आज से ब्रिक्स वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक, वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में सुधार पर होगा मंथन
निवेश के लिए सिर्फ पूंजी नहीं, भरोसा भी जरूरी: वित्त मंत्री ने कहा कि ब्रिक्स देशों के सामने चुनौती केवल पूंजी की उपलब्धता की नहीं है. निजी निवेश को बड़े पैमाने पर आकर्षित करने के लिए भरोसा, स्थिरता, पूर्वानुमेयता और विश्वसनीय दीर्घकालिक ढांचा भी जरूरी है. ऐसे वातावरण में ही निजी क्षेत्र लगातार और बड़े पैमाने पर निवेश करने के लिए आगे आता है. उन्होंने कहा कि विकासात्मक वित्त का भविष्य साझेदारी में निहित है. बहुपक्षीय विकास संस्थाओं, राष्ट्रीय सरकारों और निजी क्षेत्र की अपनी-अपनी विशिष्ट क्षमताएं हैं. इन क्षमताओं को एक साथ लाकर बड़े स्तर पर विकास परियोजनाओं के लिए निजी पूंजी जुटाई जा सकती है.
विकास वित्त में मजबूती के साथ बड़े स्तर पर काम जरूरी: आर्थिक कार्य विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर ने स्वागत भाषण में कहा कि विकासात्मक वित्त वर्तमान समय में ऐसे दौर में है, जहां बड़े पैमाने पर काम करने के साथ-साथ वित्तीय और संस्थागत मजबूती भी जरूरी है. उन्होंने कहा कि पूंजी जुटाने की व्यवस्था केवल अनुकूल परिस्थितियों पर निर्भर नहीं हो सकती, बल्कि इसके लिए लंबे समय तक टिकाऊ ढांचे तैयार करने होंगे. सेमिनार के दौरान विकास वित्त, निजी निवेश और वैश्विक पूंजी जुटाने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई.
इसे भी पढे़ं- ब्रिक्स करेंसी के पक्ष में नहीं भारत, डिजिटल कॉमर्स और नई टेक्नोलॉजी से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर: पीयूष गोयल
पैनल चर्चा में आईआरडीएआई के चेयरमैन अजय सेठ, एनडीबी के उपाध्यक्ष रोमन सेरोव, सर्ट्रेडिंग के एलेसांद्रो टेक्सीरा, टेनसेंट के वरिष्ठ सलाहकार योंगपिंग झाई और टाटा कैपिटल डिकार्बनाइजेशन फंड के पंकज सिंडवानी सहित ब्रिक्स देशों के वित्तीय संस्थानों, थिंक टैंक और अकादमिक जगत के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. सेमिनार में उभरता संदेश यही रहा कि वैश्विक विकास की रफ्तार बनाए रखने के लिए सार्वजनिक और निजी पूंजी के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है. ब्रिक्स देशों के लिए बहुपक्षीय विकास बैंक इस साझेदारी को मजबूत करने और दीर्घकालिक निवेश का भरोसेमंद ढांचा तैयार करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
Powered by Reporting Rajasthan Files
संबंधित ख़बरें

दिल्ली सराय-रोहिल्ला स्टेशन के बीच होगा ऑटोमैटिक सिग्नलिंग का काम: जोधपुर-दिल्ली वंदे भारत समेत 24 ट्रेनें कैंसिल; 7 ट्रेनों के रूट बदले, जानें असर - Jaipur News

अजमेर में पुराने मैसी फर्ग्यूसन ट्रैक्टर, कीमत और फीचर्स की जानकारी

राजस्थान में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं: वृक्षारोपण अनिवार्य बनाने की कोशिश


