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जयपुर की नींव रखवाने वाले के निशान मिटाने की तैयारी: पौंण्डरिक जी की 283 साल की हवेली को निगम नहीं मानता हेरिटेज, 2600 गज में कई पट्टे दिए - Jaipur News

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Dainik Bhaskar के अनुसार31 जुलाई 2026 को 12:39 am बजे
जयपुर की नींव रखवाने वाले के निशान मिटाने की तैयारी:  पौंण्डरिक जी की 283 साल की हवेली को निगम नहीं मानता हेरिटेज, 2600 गज में कई पट्टे दिए - Jaipur News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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जयपुर की नींव रखवाने वाले के निशान मिटाने की तैयारी:पौंण्डरिक जी की 283 साल की हवेली को निगम नहीं मानता हेरिटेज, 2600 गज में कई पट्टे दिए

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यूनेस्को से विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के बाद जयपुर की विरासत को संवारने का जिम्मा संभाल रहे नगर निगम की व्यवस्था पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक ओर निगम 97 गज के पुश्तैनी मकान की मरम्मत कराने वाली वृद्धा पर हेरिटेज के तमाम नियम लागू कर रहा है, वहीं जयपुर की स्थापना के अनुष्ठान कराने वाले राजगुरु पौंण्डरिक जी की 283 साल पुरानी 2600 गज की ऐतिहासिक हवेली को ‘सामान्य मकान’ मानकर अलग-अलग हिस्सों के पट्टे जारी कर दिए गए। अब हवेली का बड़ा हिस्सा ध्वस्त हो चुका है और भीतर प्लॉट काटे जा रहे हैं।

मरम्मत की अनुमति, आधी हवेली ध्वस्त

हवामहल-आमेर जोन ने 15 मार्च को हवेली के केवल जर्जर हिस्से की मरम्मत की अनुमति दी थी। आवेदन में दीवारों में दरारें और क्षतिग्रस्त हिस्से बताए गए, लेकिन जेसीबी लगाकर लगभग आधी हवेली तोड़ दी गई। मौके पर न जोन अधिकारी पहुंचे, ना नियोजन शाखा ने निरीक्षण किया। अब भीतर भूखंड काटे जा रहे हैं।

राजगुरु के लिए महाराजा ने बनवाई थी

- इतिहासकार बताते हैं कि महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय काशी से रत्नाकर पौंण्डरिक जी को जयपुर लाए और राजगुरु बनाया था। जयपुर की स्थापना से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों, राजसूय और अश्वमेध यज्ञ में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। बाद में उनके निवास के लिए ब्रह्मपुरी में यह हवेली बनवाई। जिस राजगुरु ने जयपुर की नींव के संस्कार कराए, आज उसी की हवेली बे-निशान होने की ओर है।

- यह ब्रह्मपुरी की प्राचीन और महत्वपूर्ण हवेलियों में है। सिटी पैलेस के निकट होने और जयपुर की स्थापना से सीधा जुड़ाव होने के बावजूद इसके संरक्षण की कोई विशेष व्यवस्था नहीं बनाई गई। चौंकाने वाली बात यह है कि निगम ने पौंण्डरिक जी की हवेली को कभी हेरिटेज की श्रेणी में रखा ही नहीं।

41 हवेलियां ढहीं, कॉम्प्लेक्स खड़े हुए

किशनपोल जोन में पिछले वर्षों में करीब 41 हवेलियां तोड़कर उनकी जगह कॉम्प्लेक्स बना दिए गए। इनमें दड़ा मार्केट, जौहरी बाजार और हल्दियों का रास्ता के 19 विवादित कॉम्प्लेक्स भी हैं, जिन्हें बाद में न्यायालय के निर्देश पर सील करना पड़ा। ऐसे में सवाल यह है कि यदि निर्माण अवैध थे तो निगम की निगरानी के बीच पूरे कैसे हो गए।

भास्कर एक्सपर्ट - चुनिंदा मकानों पर नियम लागू करना संरक्षण नहीं

रिटायर्ड सीनियर टाउन प्लानर सतीश शर्मा का कहना है कि हेरिटेज सिटी यूनेस्को की निगरानी में है। हेरिटेज संरक्षण केवल छोटे मकान मालिकों को पारंपरिक निर्माण के लिए बाध्य करना नहीं है। ऐतिहासिक भवनों की पहचान, सूचीकरण और नियमित निगरानी जरूरी है। महत्वपूर्ण हवेलियों का स्वरूप बदलता रहा तो विश्व धरोहर की साख प्रभावित हो सकती है।

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