राजस्थान निकाय चुनाव में इस बार सीधा मुकाबला नहीं, 309 निकायों के 10 हजार वार्डों में दिलचस्प लड़ाई के आसार
पार्टी टिकट पाने की जबरदस्त होड़ और बदलते स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के कारण कई वार्डों में कई पार्टियों के बीच मुकाबला होने की उम्मीद है। युवा उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की राजनीतिक पार्टियों की कोशिशों ने भी टिकट च…

सौजन्य से:- Navbharat Times
पार्टी टिकट पाने की जबरदस्त होड़ और बदलते स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के कारण कई वार्डों में कई पार्टियों के बीच मुकाबला होने की उम्मीद है। युवा उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की राजनीतिक पार्टियों की कोशिशों ने भी टिकट चाहने वालों की संख्या बढ़ा दी है।
हर वार्ड में बागी और निर्दलीय उम्मीदवार बढ़ाएंगे मुश्किल
टिकट नहीं मिलता है, तो बड़ी संख्या में बागी और निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में उतर सकते हैं। पिछले चुनाव में हर वार्ड से औसतन चार से कम उम्मीदवार मैदान में थे, लेकिन इस बार यह संख्या बढ़कर पांच के आसपास पहुंचने का अनुमान है।पार्टियां महिलाओं की ज्यादा भागीदारी पर भी ध्यान दे रही
राजस्थान में शहरी स्थानीय निकायों की संख्या 196 से बढ़कर 309 हो गई है, जबकि वार्डों की संख्या 7,500 से बढ़कर 10,245 हो गई है, जिससे चुनावी दायरा काफी बढ़ गया है। पिछले शहरी निकाय चुनावों में 9,972 महिलाओं ने चुनाव लड़ा था। इस बार राजनीतिक पार्टियां महिलाओं की ज्यादा भागीदारी पर भी ध्यान दे रही हैं। महिला उम्मीदवार न सिर्फ आरक्षित वार्डों में बल्कि सामान्य वार्डों में भी टिकट की मांग कर रही हैं।युवा उम्मीदवारों को उतारने पर जोर
भाजपा और कांग्रेस दोनों ही चुनावों में युवा उम्मीदवारों को उतारने पर जोर दे रही हैं। नतीजतन, कई युवा उम्मीदवार पार्टी टिकट की मांग कर रहे हैं और पहली बार चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। जिन्हें टिकट नहीं मिलेगा, वे निर्दलीय या बागी उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरने का फैसला कर सकते हैं। इससे अलग-अलग वार्डों में मुकाबला पिछले चुनाव के मुकाबले ज्यादा कड़ा और अनिश्चित हो सकता है। भाजपा-कांग्रेस के मुकाबले से बाहर की पार्टियों में, बीएसपी बड़ी संख्या में उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है।भाजपा-कांग्रेस के बीच सीधे मुकाबले की संभावना
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी), नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) (सीपीआई-एम) भी अपने-अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारने की रणनीति पर काम कर रही हैं। उनकी मौजूदगी से कई पारंपरिक रूप से भाजपा-कांग्रेस के बीच सीधे मुकाबले त्रिकोणीय या बहुकोणीय लड़ाइयों में बदल सकते हैं।निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन करने पर भी विचार
राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए, भाजपा-कांग्रेस कुछ वार्डों में पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार उतारने के बजाय निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन करने पर भी विचार कर सकती हैं। दोनों पार्टियों ने पिछले चुनावों में भी ऐसी ही रणनीतियां अपनाई हैं। टिकट चाहने वालों की संख्या उपलब्ध पार्टी टिकटों से ज्यादा होने की उम्मीद है, ऐसे में निर्दलीयों का समर्थन करना पार्टियों के लिए स्थानीय हितों के टकराव को संभालने और राजनीतिक समीकरणों को संतुलित करने का एक और जरिया हो सकता है।40 हजार से अधिक उम्मीदवारों के मैदान में उतरने की संभावना
पिछला शहरी निकाय चुनाव 2019 और 2021 के बीच पांच चरणों में 196 स्थानीय निकायों में हुआ था। उस समय, 7,500 वार्डों में 27,462 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था। इस बार चुनाव 309 स्थानीय निकायों में हो रहे हैं और वार्डों की संख्या बढ़कर 10,245 हो गई है। टिकट पाने के लिए पार्टी दफ्तरों में उम्मीदवारों की भीड़ और बड़ी संख्या में संभावित निर्दलीय उम्मीदवारों को देखते हुए, कुल उम्मीदवारों की संख्या 40,000 से ज्यादा हो सकती है।राजस्थान कांग्रेस के प्रवक्ता स्वर्णिम चतुर्वेदी ने कहा कि इस बार उम्मीदवारों से बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला है क्योंकि हमने उनकी उम्मीदवारी रजिस्टर करने के लिए क्यूआर कोड शुरू किए हैं। वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी इस बात पर जोर दिया कि पार्टी के लिए यह प्राथमिकता है कि नई पीढ़ी वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन में आगे बढ़े और खुद को जनसेवा के लिए समर्पित करे।
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