जयपुर निकाय चुनाव: टिकट न मिलने पर फूट फूटकर रोए BJP नेता, फिर ऐसे हुए बागी
जयपुर निकाय चुनाव: टिकट न मिलने पर फूट फूटकर रोए BJP नेता, फिर ऐसे हुए बागी बगावत करने वाले ज्यादातर नेताओं का आरोप है कि पार्टी ने उनके साथ धोखा किया है. वह सबसे योग्य और निष्ठावान दावेदार थे, लेकिन उनकी अनदेखी कर टिकट…

सौजन्य से:- abplive.com
जयपुर निकाय चुनाव: टिकट न मिलने पर फूट फूटकर रोए BJP नेता, फिर ऐसे हुए बागी
बगावत करने वाले ज्यादातर नेताओं का आरोप है कि पार्टी ने उनके साथ धोखा किया है. वह सबसे योग्य और निष्ठावान दावेदार थे, लेकिन उनकी अनदेखी कर टिकट किसी दूसरे को दे दिया गया.
राजस्थान में चल रहे नगर निकाय चुनावों में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख पार्टियों को अपने नेताओं की बगावत का सामना करना पड़ रहा है. दोनों पार्टियों के तमाम नेता बागी होकर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरे हैं और अब अपनी ही पार्टी को हराने के लिए ताल ठोक रहे हैं.
बगावत करने वाले ज्यादातर नेताओं का आरोप है कि पार्टी ने उनके साथ धोखा किया है. वह सबसे योग्य और निष्ठावान दावेदार थे, लेकिन उनकी अनदेखी कर टिकट किसी दूसरे को दे दिया गया. अपनी बगावत की कहानी सुनाते हुए कई नेता बेहद भावुक हो जा रहे हैं.
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कैमरे के सामने फूट-फूट कर रोए विश्वास सैनी
भावुक होकर आंसुओं पर कंट्रोल नहीं रख पाने वाले ऐसे ही दावेदारों में बीजेपी के युवा नेता विश्वास सैनी भी शामिल है. यह पार्टी के किसान मोर्चा के पदाधिकारी हैं. बारह साल पहले ABVP के साथ सियासी जीवन की शुरुआत की थी. तमाम महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है. जयपुर शहर के वार्ड नंबर 49 से महिलाओं के लिए रिजर्व सीट पर अपनी पत्नी के लिए पार्टी का टिकट मांग रहे थे. बीजेपी ने किसी दूसरे को उम्मीदवार बना दिया तो यह बागी हो गए और पत्नी को निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतार दिया है.
एबीपी न्यूज से की गई बातचीत में विश्वास सैनी अपनी बगावत की कहानी सुनाते हुए बेहद भावुक हो गए. कैमरे के सामने ही फूट-फूट कर रोने लगे. उनके आंसू देर तक थमने का नाम नहीं ले रहे थे. कहा कि जिस पार्टी को अपने परिवार से बढ़कर समझा, उसने उनके साथ धोखेबाजी की. उन्हें आखिरी वक्त तक सिंबल देने का भरोसा दिया गया और ऐन वक्त पर किसी दूसरे को टिकट दे दिया गया. विश्वास सैनी अब अपने इन्हीं आंसुओं के साथ प्रचार कर रहे हैं और लोगों से अपनी उस पार्टी को हराने की अपील कर रहे हैं, इसके लिए उन्होंने दिन रात पसीना बहाया था.
अविनाश सैनी ने भी दिखाए बगावती सुर
विश्वास सैनी की तरह ही अविनाश सैनी भी बीजेपी किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष हैं. पार्टी से पार्षद का टिकट मांग रहे थे. इनका भी यही दावा है कि इन्होंने लंबे समय तक पार्टी की सेवा की. नामांकन की समय सीमा खत्म होने के कुछ घंटे पहले तक इन्हें सिंबल देने का भरोसा दिलाया गया, लेकिन आखिरी वक्त में टिकट किसी और को दे दिया गया. इनका कहना है कि सिर्फ बीजेपी का नाम इस्तेमाल करने वालों को उम्मीदवार बनाया गया है और उनके जैसे सक्रिय कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की गई है. अविनाश सैनी का दावा है कि अपने स्वाभिमान और आत्मसम्मान के लिए वह बागी होकर चुनाव लड़ने को मजबूर हैं.
वजीर हुसैन कांग्रेस हुए खफा
बागियों की कहानी सिर्फ बीजेपी तक सीमित नहीं है. वजीर हुसैन नाम के कांग्रेस के नेता का दावा है कि उन्होंने 40 साल तक पार्टी की सेवा की. वह अपने वार्ड में पिछले कई सालों से ना सिर्फ सक्रिय हैं, बल्कि लोगों के काम भी करा रहे हैं. दावा है कि इलाके की जनता उन्हें ही कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर देखना चाहती थी, लेकिन पार्टी ने पैराशूट प्रत्याशी थोप दिया.
कहा जा सकता है कि नगर निकाय चुनाव में किसी और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों को बागियों से जूझना पड़ रहा है. बड़ी संख्या में बागी अपनी पार्टी की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं. अब देखना यह होगा कि प्रमुख पार्टियां किस तरह से डैमेज कंट्रोल करती हैं और बागियों व रूठे हुए नेताओं को मनाने में कामयाब होती है.
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