जोधपुर मोजड़ी को मिला GI टैग, दुनियाभर में नया स्वैग, साफा और जीरा भी कतार में
जोधपुर मोजड़ी को मिला GI टैग, दुनियाभर में नया स्वैग, साफा और जीरा भी कतार में मोजड़ी से पहले जोधपुरी बंधेज क्राफ्ट को जीआई टैग मिल चुका है. Published : July 10, 2026 at 9:35 AM IST |Updated : July 10, 2026 at 1:01 PM IS…

सौजन्य से:- ETV Bharat
जोधपुर मोजड़ी को मिला GI टैग, दुनियाभर में नया स्वैग, साफा और जीरा भी कतार में
मोजड़ी से पहले जोधपुरी बंधेज क्राफ्ट को जीआई टैग मिल चुका है.
Published : July 10, 2026 at 9:35 AM IST
|Updated : July 10, 2026 at 1:01 PM IST
जोधपुर: जोधपुर जूती यानी पारंपरिक मोजड़ी शिल्पकला को भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग मिल गया है. यह प्रमाणपत्र जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन और ग्राम विकास सेवा संस्थान, पीपाड़ सिटी के नाम पर जारी हुआ है. भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री चेन्नई ने 'मोजड़ी क्राफ्ट ऑफ जोधपुर (राजस्थान)' को जीआई संख्या 735 के तहत प्रमाणपत्र जारी किया है.
एसोसिएशन को यह प्रमाणपत्र गुरुवार को मिला. यह पंजीकरण क्लास 18 एवं 25 यानी फुटवियर के अंतर्गत हुआ है. एसोसिएशन के अध्यक्ष भरत दिनेश ने बताया कि मोजड़ी को जीआई टैग मिलने से अब जोधपुर की पारंपरिक कला को देश-विदेश में विशिष्ट पहचान मिलेगी. इससे स्थानीय कारीगरों, हस्तशिल्प उद्योग और निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा.
पढ़ें: जीआई टैग की कतार में 'जोधपुर के रत्न', इन उत्पादों को मिल सकती है आधिकारिक पहचान
मारवाड़ की 200 साल पुरानी कला: मारवाड़ में आकर्षक मोजड़ी बनाने का काम करीब 200 वर्ष पुराना है. यह लगभग पूरे मारवाड़ में फैला हुआ है. यहीं से अलग-अलग क्षेत्रों में जूती बनाने के काम का प्रसार माना जाता है. जोधपुरी उद्योग का घरेलू बाजार वर्तमान में लगभग 100 करोड़ रुपए का है, लेकिन इसका एक्सपोर्ट अभी करीब 10 करोड़ रुपए का ही है. जीआई टैग से इसे बढ़ावा मिलेगा और ई-कॉमर्स कंपनियां इसमें रुचि दिखाएंगी.
पांच साल लगे टैग हासिल करने में: मोजड़ी को जीआई टैग दिलाने के लिए 4 जनवरी, 2021 से प्रक्रिया शुरू हुई थी. इसमें विकास आयुक्त हस्तशिल्प, वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार तथा टेक्सटाइल्स कमेटी ने सुविधा प्रदाता की भूमिका निभाई. 28 मार्च 2026 को चेन्नई स्थित जीआई रजिस्ट्री की ओर से आधिकारिक प्रमाणपत्र जारी किया गया, जो गुरुवार को हैण्डीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन और ग्राम विकास सेवा संस्थान को मिला है.
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कशीदाकारी जूती को मिल चुका है पेटेंट: जोधपुर के प्रतापनगर इलाके में अपने घर से ही मोजड़ी बनाने वाले महेंद्र सोनगरा ने 'एमआर जोधपुर' के नाम से पहचान बनाई है. देश की बड़ी प्रदर्शनियों में उनकी कला का प्रदर्शन हुआ है. इनके द्वारा बनाई गई कशीदाकारी जूती का पेटेंट आईआईटी जोधपुर के सहयोग से 2023 में प्राप्त हुआ है. महेंद्र राजस्थान के पहले जूती निर्माता हैं जिनको यह पेटेंट मिला है. अब मोजड़ी को जीआई टैग मिलने से कारीगरों के दिन बहुरेंगे. मोजड़ी से पहले जोधपुरी बंधेज क्राफ्ट को जीआई टैग मिल चुका है. अब जोधपुरी साफा, मथानिया की लाल मिर्च, वुडन एंड आयरन क्राफ्ट, मारवाड़ का जीरा, जोधपुरी पत्थर की छतरियां व लहरिया के जीआई टैग की प्रक्रिया जारी है.
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