प्रमुख पदों में वृद्धि के बीच HC ने ओबीसी कोटा पर राजस्थान सरकार से जवाब मांगा
जयपुर, 3 सितंबर: राजस्थान उच्च न्यायालय ने आगामी पंचायती राज चुनावों में जिला प्रमुख पदों के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षित सीटों की संख्या को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। राधेराम गोदारा…

सौजन्य से:- The Assam Tribune
जयपुर, 3 सितंबर: राजस्थान उच्च न्यायालय ने आगामी पंचायती राज चुनावों में जिला प्रमुख पदों के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षित सीटों की संख्या को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
राधेराम गोदारा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अनूप ढांड की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने सवाल किया कि जिला प्रमुख पदों की कुल संख्या में वृद्धि के बावजूद ओबीसी-आरक्षित जिला प्रमुख पदों की संख्या अपरिवर्तित क्यों बनी हुई है।
कोर्ट ने कहा कि 2020 में 33 जिला प्रमुख पदों में से पांच ओबीसी उम्मीदवारों के लिए आरक्षित थे। हालांकि, कुल पदों की संख्या 41 तक बढ़ने के बाद, ओबीसी-आरक्षित पदों की संख्या पांच ही रह गई है।
कोर्ट ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा कि ओबीसी प्रतिनिधित्व आनुपातिक रूप से क्यों नहीं बढ़ाया गया।
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील को याचिका की एक प्रति अपर महाधिवक्ता और पंचायती राज विभाग का प्रतिनिधित्व करने वाले सरकारी वकील को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
मामले को अगली सुनवाई के लिए 8 सितंबर को सूचीबद्ध किया गया है।
याचिकाकर्ता के वकील, अरविंद शर्मा और आनंद शर्मा ने तर्क दिया कि जिला पुनर्गठन और नए जिलों के निर्माण के बाद जिला प्रमुख पदों की संख्या 33 से बढ़ाकर 41 कर दी गई थी।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, कुल पदों की संख्या में वृद्धि के साथ-साथ लागू नियमों के तहत ओबीसी आरक्षण की पुनर्गणना की जानी चाहिए थी। उन्होंने समग्र आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 50 प्रतिशत की संवैधानिक सीमा के भीतर रखते हुए, जिला प्रमुख पदों के लिए ओबीसी आरक्षण की नए सिरे से गणना करने की मांग की है।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया है कि ओबीसी उम्मीदवारों को पंचायती राज प्रणाली में उचित और आनुपातिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
याचिका में ओबीसी आयोग की रिपोर्ट को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. याचिका के मुताबिक सरकार ने आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है. याचिकाकर्ताओं ने उन मीडिया रिपोर्टों का भी हवाला दिया है जिनमें कहा गया है कि सरकार खुद इस रिपोर्ट को पूरी तरह सही नहीं मानती है। सरकार की ओर से अभी तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है.
याचिकाकर्ताओं ने लगभग 16 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण प्रदान करने के आधार पर भी सवाल उठाया है, उनका तर्क है कि अनुपात अधिक होना चाहिए। उन्होंने बताया है कि 2020 में ओबीसी के लिए 18 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया था और तर्क दिया कि, उनकी गणना के आधार पर, ओबीसी-आरक्षित जिला प्रमुख पदों की संख्या 41 पदों में से सात तक बढ़नी चाहिए।
उच्च न्यायालय ने अभी तक इन दावों की योग्यता पर फैसला नहीं सुनाया है और आगे बढ़ने से पहले सरकार से प्रतिक्रिया मांगी है।
--आईएएनएस
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