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सरकारी डिस्पेंसरी के रिकॉर्ड की जिम्मेदारी प्रभारी डॉक्टर की, अधीनस्थ पर नहीं डाल सकते दोष: राजस्थान हाईकोर्ट

सरकारी डिस्पेंसरी के रिकॉर्ड की जिम्मेदारी प्रभारी डॉक्टर की, अधीनस्थ पर नहीं डाल सकते दोष: राजस्थान हाईकोर्ट Amir Ahmad 12 Sept 2026 2:48 PM IST राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकारी आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी के प्रभारी डॉक्टर को अनि…

Live Law Hindi के अनुसार12 सितंबर 2026 को 03:04 pm बजे
सरकारी डिस्पेंसरी के रिकॉर्ड की जिम्मेदारी प्रभारी डॉक्टर की, अधीनस्थ पर नहीं डाल सकते दोष: राजस्थान हाईकोर्ट

सौजन्य से:- Live Law Hindi

सरकारी डिस्पेंसरी के रिकॉर्ड की जिम्मेदारी प्रभारी डॉक्टर की, अधीनस्थ पर नहीं डाल सकते दोष: राजस्थान हाईकोर्ट

Amir Ahmad

12 Sept 2026 2:48 PM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकारी आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी के प्रभारी डॉक्टर को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की सजा बरकरार रखते हुए कहा कि डिस्पेंसरी के रिकॉर्ड और उसमें होने वाली प्रविष्टियों की जिम्मेदारी प्रभारी अधिकारी की होती है। अधीनस्थ कर्मचारी ने अपना काम ठीक से नहीं किया तो इससे प्रभारी अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो जाता।

जस्टिस आनंद शर्मा ने सरकारी आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी, किशनपुर, बेराठ के प्रभारी रहे डॉक्टर की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।

बता दें, डॉक्टर को एक अन्य सरकारी कर्मचारी के पक्ष में अनियमित बीमारी और स्वास्थ्य प्रमाणपत्र जारी करने के आरोप में अनिवार्य रिटायरमेंट की सजा दी गई थी।

मामले में डॉक्टर पर आरोप था कि उन्होंने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए एक कर्मचारी के बीमार और स्वस्थ होने को प्रमाणित करने के लिए करीब 24 बीमारी संबंधी प्रमाणपत्र जारी किए। ये प्रमाणपत्र लगभग दो साल की अवधि से संबंधित है।

डॉक्टर की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि आरोप उनके प्रमाणपत्र जारी करने के अधिकार या योग्यता से संबंधित नहीं थे। विवाद केवल इतना था कि इन प्रमाणपत्रों की प्रविष्टियां सरकारी डिस्पेंसरी में रखे जाने वाले रजिस्टर में नहीं की गई थीं।

याचिकाकर्ता ने कहा कि रजिस्टर में प्रविष्टि करना उसका काम नहीं था, बल्कि यह जिम्मेदारी अधीनस्थ कंपाउंडर की थी।

हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता डिस्पेंसरी का प्रभारी था और नियमों व दिशा-निर्देशों के अनुसार डिस्पेंसरी के रिकॉर्ड में की जाने वाली प्रत्येक प्रविष्टि के लिए जिम्मेदार था।

कोर्ट ने कहा कि प्रभारी अधिकारी यह दलील नहीं दे सकता कि उसके अधीनस्थ ने अपना काम नहीं किया, इसलिए उसे अपनी पूरी जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया जाए।

पीठ ने यह भी महत्वपूर्ण तथ्य माना कि डॉक्टर ने कभी अपने अधीनस्थ कर्मचारी के खिलाफ उसके कर्तव्य का ठीक से पालन नहीं करने को लेकर कोई कारण बताओ नोटिस जारी किया, इसका कोई रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया।

कोर्ट ने कहा कि यदि अधीनस्थ कर्मचारी ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई थी तो प्रभारी अधिकारी को उसके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। ऐसा कोई कदम उठाए जाने का प्रमाण रिकॉर्ड पर नहीं है।

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की अन्य दलीलों को भी स्वीकार नहीं किया और सरकारी सेवा में लगाए गए अनिवार्य सेवानिवृत्ति के दंड को बरकरार रखते हुए याचिका खारिज की।

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