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कामाख्या मंदिर की पंडित विद्या देवी ने अजमेर दरगाह में टेका माथा, देश में सुख-शांति की मांगी दुआ

कामाख्या मंदिर की पंडित विद्या देवी ने अजमेर दरगाह में टेका माथा, देश में सुख-शांति की मांगी दुआ विद्या देवी ने कहा कि जंतर-मंतर छात्र आंदोलन सही था, प्रधानमंत्री के संवैधानिक पद की गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए था. Pu…

ETV Bharat के अनुसार31 जुलाई 2026 को 08:15 am बजे
कामाख्या मंदिर की पंडित विद्या देवी ने अजमेर दरगाह में टेका माथा, देश में सुख-शांति की मांगी दुआ

सौजन्य से:- ETV Bharat

कामाख्या मंदिर की पंडित विद्या देवी ने अजमेर दरगाह में टेका माथा, देश में सुख-शांति की मांगी दुआ

विद्या देवी ने कहा कि जंतर-मंतर छात्र आंदोलन सही था, प्रधानमंत्री के संवैधानिक पद की गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए था.

Published : July 31, 2026 at 1:10 PM IST

अजमेर: विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में असम के कामाख्या मंदिर से जुड़ी पंडित विद्या देवी जियारत की. उन्होंने ख्वाजा की दरगाह में आस्था की चादर और फूल पेश किए. इस मौके पर उन्होंने सूफियाना कव्वालियों का आनंद लिया और श्रद्धालुओं के बीच लंगर का वितरण किया.

विद्या देवी और उनके साथियों को दरगाह में सैयद अहमद अली नियाजी ने जियारत कराई, जबकि सैयद आसिफ अली चिश्ती ने डेलिगेशन के समस्त सदस्यों को दरबार की दस्तारबंदी कर प्रसाद भेंट किया. पंडित विद्या देवी ने दरगाह हाजिरी के बाद कहा कि पिछले दिनों दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुआ छात्र आंदोलन सही था, लेकिन प्रधानमंत्री को बुरा-भला कहना उचित नहीं था. छात्र देश का भविष्य हैं और उन्हें प्रधानमंत्री जैसे पद की गरिमा का ख्याल रखते हुए उनका सम्मान करना चाहिए. उन्होंने देश में सुख, शांति और समृद्धि की दुआ मांगी.

विद्या देवी ने बताया कि जब कभी उन्हें कुछ नया करना होता है, तो सबसे पहले ख्वाजा साहब की दरगाह में हाजिरी देती हैं और दुखी-परेशान जनता को आध्यात्मिक सहयोग के माध्यम से लाभ पहुंचाने का प्रयास करती हैं. दरगाह के खादिम सैयद अहमद अली नियाजी ने बताया कि विद्या देवी कई वर्षों से अजमेर दरगाह से जुड़ी हुई हैं और हमेशा दरगाह आकर हाजिरी देती हैं तथा अपने करीबियों के हक में ख्वाजा साहब की कृपा की मनोकामना करती हैं. पंडित विद्या देवी ने कहा कि उनके जीवन का लक्ष्य मानव सेवा है और गरीबों, लाचारों एवं दुखियों के सहयोग से उन्हें सुकून मिलता है. उन्होंने कहा कि जो कुछ भी उन्हें आध्यात्मिक शक्ति मिली है, वह अजमेर दरगाह से ही मिली है, इसलिए वे अजमेर आकर ख्वाजा साहब के चरणों में पुष्प एवं गुम्बद का शामियाना चढ़ाती हैं.

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