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राजस्थान में निजी स्कूलों का विरोध, 44 प्रावधानों पर निरीक्षण का विवाद

निजी स्कूल संचालकों ने राज शाला संबलन ऐप पर निरीक्षण के 44 बिंदुओं पर मुख्यमंत्री को पत्र देकर विरोध जताया है।

Navbharat Times के अनुसार29 जुलाई 2026 को 07:14 am बजे
राजस्थान में निजी स्कूलों का विरोध, 44 प्रावधानों पर निरीक्षण का विवाद

सौजन्य से:- Navbharat Times

निजी स्कूलों में मचा हड़कंप

हालांकि सरकार के इस फैसले से प्रदेशभर के निजी स्कूल संचालकों में हडक़ंप मच गया है। कई जिलों में निजी विद्यालय संचालकों ने इस आदेश का विरोध शुरू कर दिया है और मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपकर इसे तत्काल वापस लेने की मांग उठाई है। मंगलवार को झुंझुनूं, सीकर जिलों में तमाम स्कूल संचालकों ने अपनी स्कूल हड़ताल कर विरोध जताया। साथ ही रैली निकाल कर अधिकारियों को वापस लेने की मांग के ज्ञापन भी थमाए।‘राज शाला संबलन’ ऐप पर निजी स्कूल संचालकों का विरोध तेज, स्कूल बंद जैसा खुलकर विरोध

सरकार के इस फैसले का निजी विद्यालय संचालकों ने खुलकर विरोध शुरू कर दिया है। विभिन्न जिलों में संचालकों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए कहा है कि हर महीने 44 बिंदुओं पर ऐप आधारित निरीक्षण निजी विद्यालयों की स्वायत्तता में हस्तक्षेप है।

ये कहना है निजी स्कूल संगठनों का

झुंझुनूं जिले में निजी स्कूलों के संगठन से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारी अमित कुमार, सुरेन्द्र अहलावत, नरेन्द्र पूनिया, नरेन्द्र झाझडिय़ा, फतेहसिंह, इब्राहिम खान, प्रवीण कृष्णिया, विकास शर्मा आदि का कहना है कि स्कूलों पर अव्यावहारिक नियम थोपे जा रहे हैं। यदि सरकार ने समय रहते समाधान नहीं किया तो जिले से लेकर प्रदेश स्तर तक और बड़ा आंदोलन किया जाएगा।संचालकों का कहना है कि लगातार डिजिटल निरीक्षण से शिक्षण कार्य प्रभावित होगा और प्रबंधन का अधिक समय कागजी व तकनीकी औपचारिकताओं में व्यतीत होगा। उनका आरोप है कि इससे प्रदेश में फिर से 'इंस्पेक्टर राज' को बढ़ावा मिलेगा और अनावश्यक प्रशासनिक दबाव बढ़ेगा।स्कूल पहुंचे बिना नहीं खुलेगा निरीक्षण फॉर्म

बताते चले कि नए आदेश के बाद इस निरीक्षण से शिक्षा विभाग के अनुसार अब कागजी खानापूर्ति का दौर खत्म होगा। कई बार शिकायतें मिलती थीं कि अधिकारी स्कूल पहुंचे बिना ही कार्यालय में बैठकर निरीक्षण रिपोर्ट तैयार कर देते थे। नई व्यवस्था में ऐसा संभव नहीं होगा क्योंकि‘राज शाला संबलन’ ऐप जियो-फेंसिंग और जियो-टैगिंग तकनीक पर आधारित है। जब तक निरीक्षण अधिकारी स्कूल की वास्तविक लोकेशन पर मौजूद नहीं होगा, तब तक ऐप में निरीक्षण फॉर्म ही नहीं खुलेगा।यानी अब हर निरीक्षण पूरी तरह लाइव, डिजिटल और लोकेशन आधारित होगा।अब इन मामलों में रहेगी सरकार की नजर

सरकार ने निरीक्षण के दौरान कई ऐसे बिंदु शामिल किए हैं जिनकी शिकायतें वर्षों से अभिभावक करते आ रहे हैं। जिसके तहत किताब-ड्रेस की मोनोपोली पर रोक लगेगी। अब यह देखा जाएगा कि कहीं स्कूल प्रबंधन अभिभावकों पर किसी विशेष दुकान से किताबें, यूनिफॉर्म, जूते, बैग या अन्य सामग्री खरीदने का दबाव तो नहीं बना रहा। साथ ही यह भी जांच होगी कि हर साल बिना जरूरत पाठ्यपुस्तकें बदली तो नहीं जा रहीं।फीस वसूली पर भी रहेगी नजर

निरीक्षण के दौरान यह भी परखा जाएगा कि राजस्थान विद्यालय (फीस विनियमन) अधिनियम-2016 एवं 2017 के तहत फीस समिति का गठन किया गया है या नहीं तथा संबंधित दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड हैं या नहीं।सुरक्षा और सुविधाओं की होगी पड़ताल: स्कूलों में फायर सेफ्टी, भवन सुरक्षा प्रमाण-पत्र, खेल मैदान, विज्ञान प्रयोगशाला, छात्र-छात्राओं के लिए अलग शौचालय, दिव्यांगों के लिए रैंप और अन्य मूलभूत सुविधाओं की भी जांच होगी।

आरटीई और छात्र सुरक्षा भी जांच के दायरे में: शिक्षा के अधिकार (आरटीई) नियमों की पालना, बालवाहिनी (स्कूल वाहन सुरक्षा), प्रशासनिक व्यवस्था और पढ़ाई की गुणवत्ता का भी मूल्यांकन किया जाएगा।

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