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मानसून के दौरान दिल्ली-जयपुर हाईवे पर जलभराव और जाम का खतरा | NHAI की लापरवाही

एनएचएआई की लापरवाही के कारण दिल्ली-जयपुर हाईवे पर मानसून में जलभराव और ट्रैफिक जाम का खतरा बढ़ गया है। नालों की सफाई नहीं होने और खराब ड्रेनेज सिस्टम के कारण जल निकासी की समस्या बन रही है। यह खबरें है कि 20 किमी तक जाम लग सकता है।

Jagran के अनुसार20 जुलाई 2026 को 01:34 pm बजे
मानसून के दौरान दिल्ली-जयपुर हाईवे पर जलभराव और जाम का खतरा | NHAI की लापरवाही

सौजन्य से:- Jagran

मानसून में फिर मुसीबत: NHAI की लापरवाही से दिल्ली-जयपुर हाईवे पर जलभराव और जाम का खतरा

एनएचएआई की लापरवाही के कारण दिल्ली-जयपुर हाईवे पर मानसून में फिर से जलभराव और भारी ट्रैफिक जाम का खतरा बढ़ गया है। नालों की सफाई न होने और खराब ड्रेने ...और पढ़ें

HighLights

- एनएचएआइ की लापरवाही से नालों की सफाई अधूरी।

- नरसिंहपुर सहित कई जगह जलभराव की आशंका।

- दिल्ली-जयपुर हाईवे पर 20 किमी तक लग सकता है जाम।

संदीप रतन, गुरुग्राम। दिल्ली-जयपुर हाईवे पर बदइंतजामी की आफत फिर से शुरू होने वाली है। मानसून के दोबारा सक्रिय होने के साथ ही जलभराव और लंबे ट्रैफिक जाम का खतरा बढ़ गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) की ओर से नालों और ड्रेनेज सिस्टम की समय पर सफाई नहीं कराई गई।

हाईवे के दोनों ओर बनी खुली ड्रेन में कचरा और गाद जमा है, जबकि कई स्थानों पर जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह अस्थायी पंपों के भरोसे चल रही है। ऐसे में तेज वर्षा होने पर सिरहौल से खेड़कीदौला टोल प्लाजा तक वाहनों की लंबी कतार लगना तय माना जा रहा है।

दिल्ली-जयपुर हाईवे पर नरसिंहपुर क्षेत्र सबसे संवेदनशील जलभराव प्वाइंट बना हुआ है। यहां सर्विस लेन के साथ-साथ मुख्य हाईवे तक बरसाती पानी भर जाता है, जिससे वाहनों की रफ्तार थम जाती है। जल निकासी के स्थायी इंतजाम नहीं होने के कारण हर वर्ष अस्थायी पंपों के जरिए पानी निकालने की कवायद की जाती है, लेकिन तेज वर्षा के दौरान यह व्यवस्था भी फेल हो जाती है। इस संबंध में एनएचएआइ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर योगेश तिलक को फोन किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

20 किलोमीटर तक लग जाता है ट्रैफिक जाम

हाईवे पर सिरहौल से खेड़कीदौला टोल प्लाजा तक पहले से ही वाहनों का भारी दबाव रहता है। ऐसे में वर्षा के दौरान जलभराव होने पर स्थिति और गंभीर हो जाती है। कई बार ट्रैफिक जाम 20 किलोमीटर तक पहुंच जाता है, जिससे दिल्ली, गुरुग्राम, मानेसर, जयपुर और आसपास के क्षेत्रों के लाखों यात्रियों को घंटों परेशानी झेलनी पड़ती है।

खबरें और भी

- 10 किलोमीटर हिस्से हीरो होंडा चौक से खेड़कीदौला टोल प्लाजा तक सबसे ज्यादा खराब स्थिति है।

- 750 मीटर नई ड्रेन को हाईवे की ड्रेन से पिछले वर्ष जोड़ा गया था।

- 3 पाइपों को ट्रेंचलेस तकनीक से हाईवे की दोनों ड्रेन को कनेक्ट किया गया।

- 2 जगह जलनिकासी के लिए पंप लगाए गए हैं।

हर कदम पर दिख रही लापरवाही

हाईवे की बदहाल स्थिति एनएचएआइ की तैयारियों पर सवाल खड़े कर रही है। सात जुलाई को हुई बारिश के दौरान हाईवे की एक लेन पर बड़ा गड्ढा हो गया था। वहीं हीरो होंडा चौक फ्लाईओवर पर सात वर्ष पहले बना गड्ढा आज भी पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो सका है। इसके कारण मानेसर से गुरुग्राम की ओर आने वाली एक लेन लंबे समय से बंद पड़ी है, जिससे रोजाना यातायात प्रभावित होता है।

नालों की सफाई अधूरी, सर्विस लेन भी बदहाल

हाईवे के दोनों ओर बाक्स ड्रेन के बजाय खुली नालियां बनी हुई हैं। इनमें बड़ी मात्रा में कचरा और गाद जमा है, जबकि नियमित सफाई नहीं होने से पानी का प्रवाह बाधित हो रहा है। दूसरी ओर सर्विस लेन की हालत भी बेहद खराब है। कई हिस्सों में आरसीसी सर्विस लेन का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है, जिससे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

प्रतिबंध के बावजूद दौड़ रहे ऑटो और बाइक

हाईवे पर प्रतिबंध के बावजूद ऑटो रिक्शा और दोपहिया वाहन लगातार दौड़ रहे हैं। इससे सड़क सुरक्षा पर खतरा बढ़ रहा है और वर्षा के दौरान दुर्घटनाओं की आशंका भी अधिक रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमों का पालन कराने के लिए सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही है।

एक साल से नहीं भरा गया खोदा हुआ गड्ढा

नरसिंहपुर क्षेत्र में एक कलवर्ट की सफाई के लिए करीब एक वर्ष पहले सड़क किनारे गड्ढा खोदा गया था, लेकिन आज तक उसे भरा नहीं गया। इससे न केवल दुर्घटना का खतरा बना हुआ है, बल्कि वर्षा के दौरान जल निकासी भी प्रभावित हो रही है।

मानसून में ही याद आया सर्विस लेन का निर्माण

सबसे हैरानी की बात यह है कि मानसून शुरू होने के बाद भी कई स्थानों पर सर्विस लेन निर्माण का काम जारी है। ऐसे समय में निर्माण गतिविधियां जल निकासी और यातायात दोनों के लिए अतिरिक्त परेशानी पैदा कर रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मानसून से पहले नालों की सफाई, सर्विस लेन निर्माण और जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त कर दी जाती तो हर वर्ष होने वाली इस समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती थी।

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