Prasan Chand Mehta: कौन हैं जोधपुर के नए मेयर प्रसन्नचंद मेहता ? अशोक गहलोत के गढ़ में सेंध लगाकर सूर्यनगरी में खिलाया कमल
अशोक गहलोत के राजनीतिक गढ़ में भाजपा का सेंध जोधपुर शहर को पारंपरिक रूप से राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का गृह क्षेत्र और अजेय राजनीतिक किला माना जाता रहा है। कांग्रेस ने यहां गहलोत के सबसे करीबी सहयोगियों मे…

सौजन्य से:- Navbharat Times
अशोक गहलोत के राजनीतिक गढ़ में भाजपा का सेंध
जोधपुर शहर को पारंपरिक रूप से राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का गृह क्षेत्र और अजेय राजनीतिक किला माना जाता रहा है। कांग्रेस ने यहां गहलोत के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक राजेंद्र सिंह सोलंकी को मैदान में उतारा था। दूसरी ओर, भाजपा ने गहलोत के राजनीतिक रसूख को चुनौती देने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पृष्ठभूमि से आने वाले कैडर नेता प्रसन्नचंद मेहता पर भरोसा जताया था। जोधपुर में बीजेपी के इस चुनावी दांव ने सीधे तौर पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत के राजनीतिक वर्चस्व को गहरा झटका दिया है।प्रसन्नचंद मेहता के यहां जीत का समीकरण भी जानें
जोधपुर नगर निगम में महापौर पद के चुनाव में बीजेपी ने नतीजों को अपने पक्ष में मोड़ लिया।Pभाजपा प्रत्याशी प्रसन्नजीत (प्रसन्नचंद) मेहता जोधपुर के नए महापौर निर्वाचित हो गए, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी और कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र सोलंकी को हार का सामना करना पड़ा। सदन में कुल 100 पार्षदों की संख्या के बीच हुए इस मतदान में भाजपा प्रत्याशी प्रसन्नजीत मेहता को 53 वोट हासिल हुए, जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार राजेंद्र सोलंकी 47 वोटों पर ही सिमट गए। चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो भाजपा के पास अपने 45 निर्वाचित पार्षद थे, लेकिन बेहतरीन घेराबंदी और निर्दलीयों के समर्थन के चलते उनका आंकड़ा बढ़कर 53 तक पहुँच गया। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस के पास अपने 44 पार्षद थे, लेकिन जोड़-तोड़ की इस रेस में वे केवल 47 वोट ही जुटा सके। इस तरह 53-47 के अंतर से भाजपा ने जोधपुर नगर निगम के महापौर पद की कुर्सी पर अपना परचम लहरा दिया।चार दशकों से राजनीति में सक्रिय
प्रसन्नचंद मेहता जोधपुर की स्थानीय राजनीति में कोई नया चेहरा नहीं हैं। वे पिछले करीब चार दशकों से भारतीय जनता पार्टी और संघ संगठन में विभिन्न दायित्वों पर कार्य कर चुके हैं। वे भाजपा शहर संगठन में प्रमुख पदों पर रहने के साथ-साथ हमेशा धरातल पर कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय रहे हैं। वार्ड 82 से पार्षद चुनाव जीतने के बाद संगठन ने उनकी सादगी, अनुशासन और सर्वमान्य छवि को देखते हुए उन्हें मेयर प्रत्याशी घोषित किया थाप्रसन्नचंद मेहता नामांकन के दौरान भी रहे थे चर्चा में
चुनाव प्रचार और नामांकन प्रक्रिया के दौरान मेहता का नामांकन पत्र काफी चर्चा में रहा।सम्पत्ति का ब्योरा: चुनावी हलफनामे के अनुसार, प्रसन्नचंद मेहता मध्यम-समृद्ध पृष्ठभूमि से आते हैं और उनके पास अचल संपत्तियों के अलावा पारिवारिक जेवरात व वित्तीय निवेश शामिल हैं।
विरोधी पक्ष की आपत्ति: स्क्रूटनी के दौरान कांग्रेस विधि प्रकोष्ठ ने उनके हलफनामे में जेवरात के वजन और ब्योरे को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी। हालांकि, विधिक और कानूनी जांच के बाद निर्वाचन अधिकारी ने उनकी कागजी प्रक्रिया को वैध पाया, जिसके बाद वे चुनावी मैदान में डटे रहे।
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