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सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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मराठी भाषा केंद्र विवाद पर जयपुर में आंदोलन की चेतावनी:संगठन ने कहा- देश के सभी विश्वविद्यालयों में बनें राजस्थानी स्टडी सेंटर
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प्रदेश के विश्वविद्यालयों में मराठी भाषा अध्ययन केंद्र खोलने के राजभवन के आदेश को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ता जा रहा है। हालांकि राजभवन की ओर से बाद में सभी विश्वविद्यालयों में राजस्थानी स्टडी सेंटर से स्थापित करने के निर्देश जारी किए जाने के बावजूद इस
राजस्थान कल्चरल एंड हिस्टोरिकल फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने गुरुवार को आंदोलन की चेतावनी दी।
जवाहर कला केंद्र जयपुर में आयोजित प्रेसवार्ता में फाउंडेशन अध्यक्ष डॉ. शिव सिंह पालावत ने बताया- राजभवन ने राजस्थानी भाषा केंद्र का आदेश इसलिए जारी किया, ताकि मराठी भाषा केंद्र को लेकर चल रहा विरोध शांत हो सके। उन्होंने कहा- यदि वास्तव में क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण की भावना है तो जिस प्रकार राजस्थान के विश्वविद्यालयों में मराठी भाषा केंद्र खोलने की पहल की गई है। उसी प्रकार देश के अन्य राज्यों के विश्वविद्यालयों में भी राजस्थानी भाषा अध्ययन केंद्र स्थापित किए जाने चाहिए।
बोले- कई यूनिवर्सिटी में पहले से चल रहे राजस्थानी भाषा के विभाग
फाउंडेशन अध्यक्ष डॉ. शिव सिंह पालावत ने राजभवन और राज्य सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा- केवल राजस्थानी भाषा केंद्र खोलने की घोषणा कर देने से मूल विवाद समाप्त नहीं होता। पालावत ने कहा- प्रदेश के कई विश्वविद्यालयों में पहले से ही राजस्थानी भाषा के विभाग संचालित हैं, इसलिए अलग से अध्ययन केंद्र खोलने का आदेश व्यावहारिक और तार्किक नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा- राजस्थानी भाषा राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान और विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में इसके विस्तार के लिए समान अवसर मिलना आवश्यक है। संगठन का मानना है कि यदि एक राज्य की भाषा को दूसरे राज्य के विश्वविद्यालयों में बढ़ावा दिया जा सकता है तो राजस्थानी भाषा को भी राष्ट्रीय स्तर पर वही महत्व मिलना चाहिए।
निकाय और पंचायती राज चुनाव में असर की दी चेतावनी
डॉ. शिव सिंह पालावत ने कहा- यदि प्रदेश के विश्वविद्यालयों में मराठी भाषा अध्ययन केंद्र खोलने संबंधी आदेश वापस नहीं लिया गया तो इसका राजनीतिक असर आगामी निकाय और पंचायती राज चुनाव में देखने को मिलेगा। उन्होंने दावा किया- प्रदेश के युवाओं और राजस्थानी भाषा से जुड़े संगठनों में इस फैसले को लेकर नाराजगी है। सरकार को इसका खमियाजा भुगतना पड़ सकता है।
सभी भाषाओं को मिले सम्मान
डॉ शिवराज सिंह तंवर ने कहा- हमारा विरोध किसी भाषा विशेष से नहीं है, बल्कि सभी क्षेत्रीय भाषाओं के सम्मान के पक्षधर हैं। उन्होंने कहा- राजस्थानी भाषा को उसके अधिकार और सम्मान के साथ राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए सरकार को ठोस और समान नीति अपनानी चाहिए।
चार विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा का अलग विभाग
संगठन के वरिष्ठ सदस्य डॉ. घनश्याम बेनीवाल ने कहा- प्रदेश के 4 विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा विभाग है। इनमें राजस्थान यूनिवर्सिटी जयपुर, जेएनवीयू जोधपुर, एमएलएसयू उदयपुर, एमजीएसयू बीकानेर हैं। कोटा ओपन राजस्थानी भाषा में यूजी-पीजी करवाती है। ऐसे में राजस्थानी भाषा के अध्ययन केंद्र खोलने के दावों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रेसवार्ता के दौरान संस्थान के एडवोकेट पुष्पेंद्र सिंह, डॉ. योगेंद्र अग्रवाल और सौरभ सिंह चारण मौजूद रहे।
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